नई दिल्ली। ऑपरेशन सिंदूर (Operation Sindoor) के बाद देश की सुरक्षा एजेंसियों के सामने जासूसी का एक नया और चिंताजनक पैटर्न (Spying Pattern) सामने आया है। पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई (Pakistan’s Intelligence Agency ISI) से जुड़े हैंडलर्स सामरिक रूप से संवेदनशील सैन्य इलाकों के बाहर इंटरनेट और सोलर चालित सीसीटीवी कैमरे लगवा रहे हैं। इनकी लाइव फीड सीधे पाकिस्तान पहुंचाई जा रही है।
सबसे ताजा उदाहरण 29 अगस्त को लुधियाना में सामने आया। यहां रिछपाल सिंह ने बद्दोवाल छावनी के पास अपनी दुकान के बाहर ऐसे सीसीटीवी कैमरे लगवाए थे, जिनका रुख सैन्य वाहनों के मूवमेंट वाले रास्ते की तरफ था। पुलिस के मुताबिक आरोपी ने कैमरों का यूजर आईडी-पासवर्ड अपने पाकिस्तानी हैंडलर्स को दे रखा था, जिससे वे मोबाइल एप के जरिये कैमरों की लाइव फीड देख रहे थे। दुकान के किराये के लिए 40 हजार रुपये प्रतिमाह दिए जा रहे थे। आरोपी को अलग-अलग किश्तों में लगभग 3 लाख भी मिले थे।
जासूसी के इन मामलों का यह दौर मुख्य रूप से ऑपरेशन सिंदूर के बाद तेजी से उभरा है। इसमें सामरिक ठिकानों के आसपास ऐसे कैमरे लगाए जाते हैं, जिन्हें बिजली या पारंपरिक वायरिंग की जरूरत नहीं होती।
सिलसिलेवार एक जैसा तरीका
– मार्च 2026 : एनआईए की जांच में सोनीपत और दिल्ली छावनी रेलवे स्टेशनों के पास सोलर-चालित कैमरे लगाने का खुलासा, 21 गिरफ्तार
– अप्रैल 2026 : दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और जम्मू-कश्मीर के सैन्य क्षेत्रों के पास ऐसे 9 कैमरों का पता लगाया। इसी महीने कपूरथला और जालंधर में भी सिम-आधारित कैमरों के जरिए सैन्य गतिविधियों की लाइव फीड पाकिस्तान भेजने के सबूत मिले।
– मई 2026 : पठानकोट राष्ट्रीय राजमार्ग पर दुकान में कैमरा लगाकर सेना के मूवमेंट पर नजर रखने वाले आरोपी दबोचे गए।
– जून 2026 : बठिंडा में राजमार्ग पर पुलिस और सुरक्षा बलों की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए खंभे पर लगाया गया सोलर कैमरा बरामद।
– अगस्त 2026 : केंद्रीय एजेंसियों ने पाकिस्तानी गैंगस्टर शहजाद भट्टी नेटवर्क के खिलाफ 14 राज्यों में चलाया अभियान, 253 लोग हिरासत में, 200 से ज्यादा गिरफ्तार, आईईडी और हथियारों के साथ बड़ी संख्या में कैमरे भी बरामद।
एडल्ट साइट पर कर रहे खुफिया बातचीत
रक्षा एजेंसियों ने जम्मू-कश्मीर में आतंकियों के नए और खतरनाक हथकंडे का खुलासा किया है। खुफिया निगरानी से बचने के लिए आतंकी पारंपरिक सोशल मीडिया की जगह डेटिंग और चैट के नाम पर चलने वाली एडल्ट वेबसाइट्स और विशेष एनक्रिप्टड एप्स पर सीक्रेट चैट का इस्तेमाल कर रहे हैं। पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई और आतंकी हैंडलर घाटी में सक्रिय आतंकियों और मददगारों को निर्देश भेजने के लिए इन्हीं का उपयोग कर रहे हैं।
खुफिया रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान में बैठे हैंडलर और आतंकी कोटेक्स व कोनियन जैसे टोर नेटवर्क आधारित मैसेजिंग एप्स का इस्तेमाल कर रहे हैं। यह डाटा कई देशों के एन्क्रिप्टेड नोड्स से गुजरता है, जिससे पहचान छिपाना आसान हो जाता है। भारत में कोनियन की एपीके फाइल पर रोक है, पर उपयोग जारी है।
भारत में कई एडल्ट एप्स पर पाबंदी है, लेकिन वीपीएन के जरिये गैरकानूनी रूप से डाउनलोड कर रहे हैं। आतंकी अब व्हाट्सएप, फेसबुक मैसेंजर और सिग्नल जैसे सामान्य प्लेटफॉर्म्स से दूरी बना रहे हैं। नए तंत्र में आरएसए-2048 जैसे आधुनिक एन्क्रिप्शन एल्गोरिदम, सेल्फ-डस्ट्रक्ट मैसेज व बिना नंबर या ईमेल के रजिस्ट्रेशन जैसी सुविधाएं हैं। आतंकी फ्रांस, चीन व वियतनाम के ऐसे एप का इस्तेमाल कर रहे हैं, जिनमें सिम कार्ड या फोन नंबर की जरूरत नहीं होती।
