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नेपाल के प्रधानमंत्री के बयान की छात्र संगठनों ने निंदा की, माफी की मांग

काठमांडू। नेपाल के 10 छात्र संगठनों ने संयुक्त रूप से प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह के सीमा संबंधी मुद्दे पर रविवार को संसद में दिए बयान की कड़ी निंदा की है और उनसे तत्काल बयान वापस लेने और सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग की है।

अखिल नेपाल राष्ट्रीय स्वतंत्र विद्यार्थी यूनियन, अखिल (समाजवादी), अखिल (छठौं), अनेरास्ववियु (क्रांतिकारी), वैज्ञानिक समाजवादी विद्यार्थी संगठन नेपाल, जनपक्षीय विद्यार्थी यूनियन नेपाल सहित विभिन्न छात्र संगठनों के नेताओं ने सोमवार को एक संयुक्त बयान में प्रधानमंत्री की टिप्पणी को राष्ट्रविरोधी, आत्मसमर्पणवादी और राष्ट्रीय हितों के खिलाफ बताया है।

छात्र संगठनों ने कहा कि ऐसे समय में यह बयान आना बेहद चिंताजनक है, जब नेपाल लगातार यह दावा करता रहा है कि लिपुलेख, कालापानी और लिम्पियाधुरा सहित उसके कुछ क्षेत्र भारतीय कब्जे में हैं।

बयान में कहा गया है कि नेपाल की संप्रभुता, स्वतंत्रता और भौगोलिक अखंडता को कमजोर करने वाली किसी भी टिप्पणी को स्वीकार नहीं किया जा सकता और इसकी कड़ी निंदा की जानी चाहिए। छात्र नेताओं ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री के बयान को केवल एक साधारण भूल नहीं माना जा सकता, बल्कि यह राष्ट्रीय हितों के विपरीत एक राजनीतिक सोच को दर्शाता है।

छात्र संगठनों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों की अनदेखी की गई तो देशभर के छात्र, युवा और राष्ट्रभक्त नागरिक राष्ट्रीय संप्रभुता और हितों के खिलाफ बताए गए कदमों के विरोध में और सशक्त आंदोलन शुरू करेंगे। 

छात्र संगठनों का यह संयुक्त बयान ऐसे समय में आया है जब नेपाल-भारत सीमा विवाद को लेकर संसद में प्रधानमंत्री द्वारा दिए गए वक्तव्य पर राजनीतिक दलों, संवैधानिक विशेषज्ञों और नागरिक समाज के विभिन्न वर्गों की ओर से लगातार आलोचना हो रही है।

उल्लेखनीय है कि बालेंद्र शाह ने रविवार को संसद में कहा था कि प्रधानमंत्री बनने के बाद उन्हें पता चला कि न सिर्फ भारत ने नेपाल की जमीन पर कब्जा किया है, बल्कि नेपाल ने भी कई जगहों पर भारत की जमीन पर कब्जा किया है। 

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