गहन चोट से शब्दों का अभाव
हृदयनारायण दीक्षित
राष्ट्र स्तब्ध है। देश की सर्वोच्च न्यायपीठ के मुख्य न्यायाधीश पर जूता फेंके जाने की घटना से जन गण मन आहत है। हालांकि मुख्य न्यायाधीश ने अब तक घटना पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी थी। अब उन्होंने कहा है कि, ”जो कुछ हुआ उससे बहुत स्तब्ध था।” मुख्य न्यायाधीश ने यह भी कहा कि उनके सहयोगी न्यायमूर्ति उज्जवल भुइयां ने इससे भिन्न राय प्रकट की है। यह अच्छी बात है कि मुख्य न्यायाधीश ने इसे एक भुला दिया गया अध्याय बताया है, लेकिन देश में इस घटना पर अच्छी खासी बहस है। भुइयां ने कहा है, “इस पर मेरी अपनी राय है। वह भारत के चीफ जस्टिस हैं। यह उच्चतर संस्था का अपमान है।”
राष्ट्रीय स्तर पर चर्चित इस घटना ने कई दिशाओं में नया सोचने की आवश्यकता प्रकट की है। घटना की गंभीरता का पता इसी बात से चलता है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने भी घटना की न...









