कोलकाता, 12 अक्टूबर।
बंगाल के इतिहास को नए दृष्टिकोण से प्रस्तुत करने वाली फिल्म “शरणार्थी – द रिफ्यूजीज” पर काम शुरू हो गया है। इसका निर्देशन डॉक्युमेंट्री फिल्मकार संगीता दत्ता कर रही हैं और इसमें प्रमुख भूमिका निभा रहे हैं त्रिपुरा और मेघालय के पूर्व राज्यपाल तथा लेखक तथागत राय। यह फिल्म तथागत राय की चर्चित पुस्तक “माय पीपल अपरूटेड” पर आधारित है, जिसमें धर्म के आधार पर हुए भारत विभाजन और पूर्वी बंगाल से हिंदू बंगालियों के जबरन विस्थापन की कहानी को चित्रित किया गया है।

संगीता दत्ता के अनुसार फिल्म में तथागत राय के साथ दो अन्य प्रमुख पात्र हैं – जन्मजीत राय, जो असम के बांग्ला भाषी हिंदू शरणार्थियों से जुड़े रहे हैं, और दिनु दास, जो पूर्वी पाकिस्तान से पलायन कर भारत आए एक परिवार से हैं। यह तीनों पात्र विभाजन और रैडक्लिफ रेखा से जुड़ी ऐतिहासिक पीड़ा और विस्थापन की खोज में निकलते हैं।
फिल्म का निर्माण सीमित संसाधनों में किया जा रहा है। संगीता ने बताया कि उन्होंने इसके लिए बैंक से ऋण लिया है और तथागत राय के कुछ मित्रों के सहयोग से वर्ष 2022 से काम जारी है। अब तक लगभग 10 लाख रुपये खर्च हो चुके हैं जबकि फिल्म का केवल 12 से 14 प्रतिशत कार्य पूरा हुआ है। पर्याप्त वित्तीय सहयोग मिलने पर यह फिल्म 2026 के मध्य तक पूरी हो सकती है।
संगीता दत्ता ने भौतिकी की पढ़ाई के बाद रवींद्र भारती विश्वविद्यालय से नाट्यकला में स्नातकोत्तर किया। उन्होंने 1994 में एनएफडीसी निर्मित ओड़िया फिल्म “निर्वाचन” में सहायक निर्देशक और अभिनेत्री के रूप में काम किया था, जिसे राष्ट्रीय पुरस्कार मिला था। इसके बाद उन्होंने भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय, साहित्य अकादमी और इंदिरा गांधी नेशनल सेंटर फॉर आर्ट्स जैसी संस्थाओं के लिए आदिवासी जीवन और संस्कृति पर कई डॉक्युमेंट्री फिल्में बनाई हैं।

फिल्म की विषयवस्तु विभाजन के साथ-साथ धर्मांतरण और सांस्कृतिक पहचान से जुड़े पहलुओं पर केंद्रित है। इसमें बख्तियार खिलजी के भारत आक्रमण, नालंदा विश्वविद्यालय के विध्वंस और असम की जनजातियों में धर्मांतरण जैसी ऐतिहासिक घटनाओं को भी शोध आधारित दृश्यों के रूप में शामिल किया गया है।
फिल्म का स्क्रिप्ट तथागत राय की पुस्तक के साथ-साथ इतिहासकार सर यदुनाथ सरकार की “हिस्ट्री ऑफ बंगाल – मुस्लिम पीरियड” और एम्स्टर्डम विश्वविद्यालय के इतिहासकार विलियम वॉन शैंडेल की “द बंगाल बॉर्डरलैंड” पर आधारित है। इसमें विभाजन के प्रत्यक्षदर्शियों जैसे रवींद्रनाथ दत्ता, श्यामलेश दास और रंजीत कर की यादें भी शामिल की गई हैं।
“शरणार्थी – द रिफ्यूजीज” बांग्ला और असमिया भाषाओं में बनाई जा रही है, जिनमें अंग्रेजी उपशीर्षक होंगे। संगीता ने एनएफडीसी और केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय से वित्तीय सहायता की मांग की है। इसके अलावा उन्होंने पश्चिम बंगाल भाजपा अध्यक्ष शमिक भट्टाचार्य और असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा से भी सहयोग प्राप्त किया है।

संगीता का कहना है कि इस फिल्म का उद्देश्य राजनीति नहीं, बल्कि इतिहास को निष्पक्ष दृष्टि से प्रस्तुत करना है। वह इसे एक नृजातीय और ऐतिहासिक अध्ययन के रूप में देखती हैं, जो विभाजन और विस्थापन की मानवीय कहानी को सजीव रूप में दिखाएगी।
