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अब हिंद महासागर के इस द्वीप को खरीदना चाहते हैं ट्रंप; भारत से है महज इतनी दूरी; क्या वजह?


वाशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अब हिंद महासागर में एक द्वीप खरीदने की योजना बना रहे हैं। दरअसल ट्रंप के निशाने पर इस क्षेत्र का एक बेहद अहम द्वीप समूह है। रिपोर्ट्स के मुताबिक ट्रंप सरकार इस द्वीप को खरीदने के लिए अच्छी खासी रकम चुकाने को भी तैयार है। एक और अहम बात यह है कि यह द्वीप भारत से महज 1600 किमी की दूरी पर स्थित है।

हिंद महासागर में स्थित इस द्वीप का नाम है- चागोस। द टेलीग्राफ की रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप प्रशासन चागोस द्वीप समूह को मॉरीशस से खरीदने की तैयारी में है। यह जानकारी ऐसे समय में सामने आई है जब हाल ही में चर्चा थी कि ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर जल्द ही इस रणनीतिक रूप से अहम द्वीप की संप्रभुता मॉरीशस को सौंपने जा रहे हैं। हालांकि अब ट्रंप प्रशासन ब्रिटेन को दरकिनार कर सीधे मॉरीशस से बात करने का प्रस्ताव तैयार कर रहा है।
सैन्य अड्डा मौजूद

बता दें कि चागोस द्वीपसमूह का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा डिएगो गार्सिया है। यहां अमेरिका और ब्रिटेन का संयुक्त सैन्य अड्डा मौजूद है। यह सैन्य अड्डा हिंद महासागर के बीचों-बीच स्थित है और अमेरिका को पश्चिम एशिया, अफ्रीका और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में एक बड़ी रणनीतिक बढ़त देता है। अब अमेरिका इसे खरीदकर यह बढ़त हमेशा के लिए बनाए रखना चाहता है।
ट्रंप को किस बात की चिंता?

चागोस द्वीप को ट्रंप यूं ही नहीं खरीदना चाहते। इसके पीछे की वजह चीन और ईरान हैं। दरअसल मॉरीशस के चीन और ईरान के साथ अच्छे संबंध हैं। अब अमेरिकी अधिकारियों को आशंका है कि अगर चागोस के द्वीपों पर ब्रिटेन की जगह मॉरीशस का पूर्ण नियंत्रण हो गया तो चीन इस क्षेत्र में अपना प्रभाव बढ़ा सकता है। ट्रंप प्रशासन के अधिकारियों का यह भी मानना है कि अगर द्वीप पर मॉरीशस का नियंत्रण हुआ, तो समुद्र में अमेरिकी नौसेना की जासूसी का खतरा भी बढ़ जाएगा।

वहीं डिएगो गार्सिया अमेरिका के लिए हिंद महासागर में नौसैनिक मौजूदगी बनाए रखने के लिए बेहद अहम है। इससे अमेरिका को ईरान जैसे देशों पर नजर रखने और जरूरत पड़ने पर सैन्य कार्रवाई करने में मदद मिलेगी। बॉम्बर डिएगो गार्सिया की लोकेशन ऐसी है कि यहां से अमेरिकी सेना के बी-2 स्पिरिट जैसे घातक स्टील्थ बॉम्बर्स सीधे ईरान पर हमला करने के लिए उड़ान भर सकते हैं।
स्टार्मर का प्लान ट्रंप को नहीं पसंद

शुरुआत में ट्रंप ने ब्रिटेन द्वारा चागोस द्वीप समूह की संप्रभुता मॉरीशस को लौटाए जाने की योजना का समर्थन किया था। हालांकि अब हालात बदल गए हैं। बीते 2 मार्च को दिए एक इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा था कि वह ब्रिटिश पीएम से बेहद निराश हैं। इसकी वजह यह थी कि ईरान के साथ चल रहे युद्ध के शुरुआती दिनों में स्टार्मर ने अमेरिका को ईरान पर हमला करने के लिए डिएगो गार्सिया बेस का इस्तेमाल करने की इजाजत देने से साफ इनकार कर दिया था। इसके बाद ट्रंप ने इस डील को ‘ब्रिटेन की कमजोरी’ बताया था। अब चूंकि अमेरिका की मंजूरी के बिना यह डील लागू नहीं हो सकती, इसलिए ब्रिटिश सरकार को चागोस द्वीप सौंपने का अपना प्लान फिलहाल होल्ड पर रखना पड़ा है।
कीमत चुकाने को तैयार अमेरिका

रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका इस द्वीप को सीधे मॉरीशस से खरीदने के लिए एक रणनीति पर काम कर रहा है। इसके तहत ब्रिटेन पहले यह द्वीप मॉरीशस को सौंपेगा और इसके बाद करीब 35 बिलियन यूरो देकर 99 साल की लीज पर ले लेगा। यह डील फाइनल होते ही अमेरिका सीधे मॉरीशस को ‘काउंटर-ऑफर’ देकर द्वीप खरीद लेगा।
क्या कह रहा है मॉरीशस?

इस बीच मॉरीशस ने ऐसे किसी भी डील को मानने से इनकार कर दिया है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक मॉरीशस ने कहा है कि उसे ट्रंप प्रशासन की ओर से ऐसा कोई आधिकारिक प्रस्ताव नहीं मिला है। मॉरीशस की सरकार ने एक बयान में कहा, “अब तक हमें अमेरिकी प्रशासन की ओर से डिएगो गार्सिया या चागोस द्वीप समूह को लेकर कोई प्रस्ताव नहीं मिला है।” मॉरीशस की सरकार ने आगे कहा कि चागोस पर मॉरीशस की संप्रभुता से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।

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