खेती में बदलाव की अग्रदूत बन रही हैं महिलाएं, प्राकृतिक खेती से सशक्त हो रहा ग्रामीण भारत
नई दिल्ली, 12 अक्टूबर। भारत में खेती के क्षेत्र में अब महिलाएं नवाचार और परिवर्तन की नई कहानी लिख रही हैं। वे केवल खेतों की मेहनतकश नहीं रहीं, बल्कि अब वे कृषि नवाचार, उद्यमिता और आत्मनिर्भरता की बागडोर संभाल रही हैं। आज की महिला किसान खेती को परंपरा, विज्ञान और संवेदना के संगम से आगे बढ़ा रही हैं।
भारत की कृषि व्यवस्था में लंबे समय से पुरुषों का प्रभुत्व रहा है, लेकिन अब महिलाएं उस बदलाव की अग्रदूत बन रही हैं, जिसे ‘साइलेंट इनोवेशन’ कहा जा सकता है। वे मिट्टी की नमी से लेकर बीजों की गुणवत्ता तक, हर पहलू को अपनी समझ से दिशा दे रही हैं।
महिलाओं के इस नेतृत्व की सबसे बड़ी मिसाल प्राकृतिक खेती है — एक ऐसा आंदोलन जो अब पूरे देश में फैल रहा है। देशी गाय के गोबर, गोमूत्र, जीवामृत और बीजामृत से चलने वाली यह खेती न केवल मिट्टी को फिर से उपजाऊ बना रही है बल्कि किसानों को रासायनिक उर्वरकों ...









