
वाशिंगटन, 07 नवंबर (प्रेस ब्यूरो)। अमेरिका में स्थायी डेलाइट सेविंग टाइम लागू करने की पहल को लेकर बहस तेज हो गई है। अमेरिकन एकेडमी ऑफ स्लीप मेडिसिन ने चेतावनी जारी की है कि यदि यह उपाय कायम किया जाता है तो यह बच्चों और किशोरों की नींद, पढ़ाई, मानसिक स्वास्थ्य तथा सुरक्षा पर गहरा नकारात्मक असर डाल सकता है। संस्था के अनुसार, सर्दियों में सूर्योदय का समय देर से होने के कारण बच्चे अंधेरे में उठकर स्कूल जाना पड़ेगा, जिससे उनकी ऊर्जा स्तर और ध्यान केंद्रित करने की क्षमता कम हो सकती है।
संगठन ने बताया कि स्थायी डेलाइट सेविंग टाइम के कारण सुबह के समय सूर्य की रोशनी देर से पहुँचती है, जिससे कई युवा अपने प्राकृतिक सर्कैडियन रिदम के साथ तालमेल नहीं बिठा पाते। इससे न केवल नींद की मात्रा घटती है, बल्कि मूड में उतार-चढ़ाव और समग्र स्वास्थ्य में गिरावट देखी गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि मानक समय मानव शरीर की जैविक घड़ी के अधिक अनुकूल है और यह प्राकृतिक प्रकाश‑अंधकार चक्र के साथ बेहतर तालमेल रखता है।
हर साल नवंबर के पहले रविवार को डेलाइट सेविंग टाइम समाप्त कर घड़ियों को मानक समय पर बदला जाता है; इस वर्ष का परिवर्तन 1 नवंबर को हुआ। इस पहल पर पहले 4 अक्टूबर को डोनाल्ड ट्रंप ने टिप्पणी की थी कि मौजूदा समय‑परिवर्तन प्रणाली अनावश्यक है और उन्होंने इसे लेकर असंतोष व्यक्त किया था।
स्थायी डेलाइट सेविंग टाइम को लागू करने का प्रस्ताव वर्तमान में अमेरिकी संसद में चर्चा के अधीन है। इस वर्ष की शुरुआत में प्रतिनिधि सभा ने इस प्रस्ताव का समर्थन करने हेतु मतदान किया, जबकि अंतिम निर्णय अभी सीनेट के हाथ में है। विशेषज्ञ इस बात पर ज़ोर दे रहे हैं कि स्थायी मानक समय को प्राथमिकता दी जानी चाहिए, ताकि नागरिकों की नींद और समग्र स्वास्थ्य सुरक्षित रह सके।
