
उज्जैन, 07 नवंबर (हिंदी समाचार)। मध्य प्रदेश के उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में शनिवार तड़के भगवान महाकाल की भस्म आरती विशेष श्रृंगार के साथ संपन्न हुई। कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी पर सुबह ४ बजे मंदिर के पट खोले गए और गर्भगृह में विराजित देवी‑देवताओं की पूजा के बाद महाकाल का जलाभिषेक किया गया। अभिषेक में दूध, दही, घी, शहद, शक्कर और फलों के रस से तैयार पंचामृत का उपयोग किया गया और विधि‑विधान के अनुसार पूजन किया गया।
पूजन के प्रारम्भ में प्रथम घंटाल बजाकर भगवान को हरिओम का जल अर्पित किया गया। तत्पश्चात बाबा महाकाल को आकर्षक श्रृंगार दिया गया। ज्योतिर्लिंग को रजत ओम, बिल्वपत्र के मुकुट और रुद्राक्ष की माला से सुशोभित किया गया। भगवान के मस्तक पर त्रिपुंड और त्रिशूल सजाए गए, साथ ही डमरू, शेषनाग का रजत मुकुट, रजत मुंडमाल तथा सुगंधित पुष्पों की मालाएँ अर्पित की गईं। अतिरिक्त रूप से भांग और चंदन से भी अलंकरण किया गया।
अभिषेक व श्रृंगार के बाद भगवान महाकाल को फल‑मिष्ठान का भोग अर्पित किया गया। कपूर आरती और नैवेद्य पूजन के पश्चात भस्म आरती की प्रक्रिया प्रारम्भ हुई। मंत्रोच्चार के बीच ज्योतिर्लिंग को वस्त्र से ढंक कर भस्म अर्पित किया गया। इस दौरान परम्परानुसार महानिर्वाणी अखाड़े की ओर से भस्म अर्पित किया गया, जिससे मान्यता है कि भस्म अर्पण के बाद भगवान महाकाल निराकार से साकार स्वरूप में भक्तों को दर्शन देते हैं।
इस अलौकिक आरती के दर्शन के लिये बड़ी संख्या में श्रद्धालु नंदी हॉल और मंदिर परिसर में उपस्थित रहे। भक्तों ने बाबा महाकाल का दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया तथा कई भक्तों ने नंदी महाराज के दर्शन कर अपने मनोकामनाओं को उनके कान में कहा। पूरे समागम में बाबा महाकाल के जयकारों की गूँज सुनाई दी, जिससे माहौल आध्यात्मिक उत्साह से भर गया।
