
उज्जैन, मध्य प्रदेश, विश्व‑प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग भगवान महाकाल के आंगन में 6 नवंबर को धनतेरस के अवसर पर एक विशेष पूजन के साथ पाँच दिवसीय दीपोत्सव की शुरुआत होगी। इस पवित्र कार्यक्रम में पुजारी और पंडे‑पुजारी की एक बड़ी संख्या एकत्र होगी।
पुजारी समिति के सदस्य लोकेश व्यास ने गुरुवार को बताया, “पुजारी-पुरोहित भगवान महाकाल के साथ धन कुबेर और चांदी के सिक्कों का पूजन‑अभिषेक करेंगे। बाबा महाकाल को चांदी का सिक्का भी अर्पित किया जाएगा।” इस दौरान सुबह भस्म आरती में विशेष पूजन होगा। पुजारी-पुरोहित गर्भगृह में फुलझड़ी जलाकर दीपावली पर्व की शुरुआत करेंगे।

उन्होंने दोहराया, “उन्होंने बताया कि पूजन में उज्जैन कलेक्टर रोशन सिंह, एसपी प्रदीप शर्मा सहित करीब दो दर्जन पंडे‑पुजारी शामिल होंगे।” इसी दिन सुबह लगभग नौ बजे नंदीहाल में पुरोहित समिति की ओर से गणपति और महालक्ष्मी पूजन के बाद भगवान महाकाल का पंचामृत और रुद्राभिषेक किया जाएगा। इस पूजन में सुख‑समृद्धि, आरोग्य और विश्व कल्याण की कामना की जाएगी।
मध्य प्रदेश के उज्जैन में दीपावली की परंपरा अलग है, जहाँ केवल दीप जलाने और आतिशबाजी तक सीमित नहीं है। धनतेरस से लेकर दीपोत्सव तक विशेष पूजन, अभिषेक, शृंगार और भोग की प्रथा है। विशेष रूप से गर्भगृह में फुलझड़ी से भक्ति की भव्यता देखी जाएगी।
इस वर्ष 8 नवंबर को चतुर्दशी और अमावस्या एक ही दिन पड़ रही हैं, जिससे भस्म आरती के दौरान दीपोत्सव का आयोजन और भी खास बन रहा है। नगरवासी शाम को अपने घरों में दीप जलाकर पर्व मनाएंगे, जबकि मंदिर में फुलझड़ी से सजाया गया गर्भगृह और मंदिर परिसर का दृश्य मनमोहक रहेगा।
