
इंदौर, 05 नवंबर (प्रेस ब्यूरो)। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के महासचिव दत्तात्रेय होसबाले ने आज इंदौर के डेली कॉलेज में तीन दिन चल रही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल की बैठक के समापन पर कहा कि आरक्षण की व्यवस्था वंचित एवं पिछड़े वर्ग की उन्नति व सामाजिक समरसता के लिये अनिवार्य है और इसे बनाए रखना चाहिए। उन्होंने कहा, “आरक्षण के फ़ायदे उन सभी लोगों तक पहुँचने चाहिए जो इसके हकदार हैं; यदि कुछ वर्गों को लाभ मिल रहा है और अन्य छूट रहे हैं तो आवश्यक सुधारों पर विचार किया जाना चाहिए। पर ऐसे सुधार उन समुदायों से मिलकर किए जाने चाहिए जिन्हें आरक्षण का लाभ मिल रहा है।”

बैठक में लगभग 400 प्रतिनिधि उपस्थित थे और होसबाले ने संघ के शताब्दी वर्ष के कार्यक्रमों, सामाजिक समरसता, आपदा राहत और भविष्य के कार्यदिशा पर चर्चा की। उन्होंने बताया कि शताब्दी वर्ष में 94,218 हिंदू सम्मेलन आयोजित किए गये जिनमें करीब पांच करोड़ लोगों ने हिस्सा लिया। संघ ने वर्ष में 10,241 नए स्थानों तक पहुँच बनाई और वर्तमान में 63,208 स्थानों पर 99,423 शाखाएँ चल रही हैं, साथ ही 34,982 साप्ताहिक मिलन और 14,096 मासिक मंडलियाँ।

आपदा राहत के क्षेत्र में असम के शिवसागर और जोरहाट, नागालैंड के पहाड़ी क्षेत्र तथा चित्रकूट में हुए बाढ़, अतिवृष्टि और चक्रवात से प्रभावित परिवारों को सहायता पहुँचाई गई। असम में 42,200 परिवारों को भोजन, पानी, दवाइयाँ और पुनर्निर्माण सामग्री उपलब्ध कराई; नागालैंड में 67,700 परिवारों और 805 गांवों को सहायता; चित्रकूट में 2,000 परिवारों और 28 गांवों को राहत। ओडिशा और आंध्र प्रदेश के तटीय क्षेत्रों में भी चक्रवात से क्षतिग्रस्त घर, फसल और नारियल के पेड़ों के लिए स्वयंसेवकों ने सहायता की।
बैठक में युवाओं की नशे से दूर रखने, समाज के सभी वर्गों में समरसता बढ़ाने व संगठन के भविष्य पर भी चर्चा हुई। होसबाले ने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ समाज का अंग है और पंजीकृत तथा गैर-पंजीकृत दोनों संगठन देश के कानून के अनुसार कार्य करते हैं। यह स्पष्ट किया गया कि शताब्दी वर्ष के अनुभवों को आगे चलकर लगातार सामाजिक गतिविधियों में परिवर्तित किया जाएगा।
