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रक्षा मंत्री ने जैसलमेर में आधुनिकीकरण के लिए वित्तीय संसाधनों की उपलब्धता पर बल दिया

नई दिल्ली, 04 नवंबर (प्रेस ब्यूरो)। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने आज जैसलमेर में आयोजित रक्षा मंत्रालय की संसदीय सलाहकार समिति की बैठक में सेनाओं के आधुनिकीकरण के लिये उपलब्ध वित्तीय संसाधनों पर जोर देते हुए कहा कि इसी परिप्रेक्ष्य में हमने आधुनिकीकरण बजट को साल दर साल बढ़ाया और उसी अनुसार खर्च भी किया है। उन्होंने बताया कि वर्तमान परिवर्तनशील परिस्थितियों में तकनीक युद्ध का अनिवार्य अंग बन गई है, अतः नई हथियारों और मिसाइलों का परीक्षण निरंतर चल रहा है। सेनाएँ भी यह समझती हैं कि सरकार उनकी आवश्यकताओं के प्रति प्रतिबद्ध है, और इसलिए वे महत्वपूर्ण कार्यों को प्राथमिकता देकर बजट का कुशल उपयोग करती हैं।

रक्षा मंत्री ने स्पष्ट किया कि हमारा लक्ष्य केवल नए उपकरण प्राप्त करना नहीं है, बल्कि एक ऐसा डिफेंस इकोसिस्टम तैयार करना है जिसमें हमारी सेनाओं की जरूरतों के अनुरूप तकनीक का विकास हो, भारतीय उद्योग की भागीदारी बढ़े और देश की रणनीतिक निर्भरता घटे। उन्होंने कहा कि आधुनिकीकरण का अर्थ केवल नए हथियार और उपकरण खरीदना नहीं है, बल्कि यह हमारी सेना की ऑपरेशनल तैयारी को सुदृढ़ करना, उन्हें आधुनिक तकनीक से लैस करना और देश के भीतर ऐसी क्षमताओं का निर्माण करना है, जिन पर हम दीर्घकालिक भरोसा कर सकें। इस दिशा में आत्मनिर्भर भारत का हमारा संकल्प अत्यंत महत्वपूर्ण है।

वे आगे बोले कि युद्ध में सबसे बड़ी शक्ति हमारा मानव संसाधन है और युद्ध व युद्ध-लड़ने वाले सिस्टम में हो रहे तेज बदलाव हमें यह विचार करने के लिए प्रेरित कर रहे हैं कि हमारी सेनाएँ और उनकी फॉर्मेशन आधुनिक युद्ध की आवश्यकताओं के अनुरूप हों। इस उद्देश्य से तीनों सेनाओं ने अपने स्ट्रक्चर और फॉर्मेशन में लगातार सुधार और बदलाव किए हैं। उदाहरण के तौर पर, हमारी सेना में स्थापित असनी, भैरव और शक्तिबाण प्लाटून जैसी नई फॉर्मेशन आज के ऑपरेशनल ज़रूरतों और युद्ध की बदलती परिस्थितियों के अनुकूल बहुत उपयोगी सिद्ध हो रही हैं।

रक्षा मंत्री ने बताया कि हथियारों और मिसाइलों के निर्माण में हमने प्राइवेट सेक्टर को बढ़ावा दिया है। लघु उद्योगों से लेकर बड़ी कंपनियों तक रक्षा क्षेत्र में योगदान कर रहे हैं। रक्षा में आत्मनिर्भरता की दिशा में हमारी प्रगति रक्षा उत्पादन और रक्षा निर्यात में भी परिलक्षित हो रही है। वित्त वर्ष 2014‑15 में हमारा रक्षा उत्पादन 46,429 करोड़ रुपये था, जो वित्त वर्ष 2025‑26 में बढ़कर रिकॉर्ड 1 लाख 78 हज़ार करोड़ रुपये हो गया। रक्षा निर्यात 2014 में 2 हज़ार करोड़ रुपये से कम था, जो अब लगभग 40 हज़ार करोड़ रुपये तक पहुँच गया है। हमारा लक्ष्य 2029 तक रक्षा उत्पादन को 3 लाख करोड़ रुपये और रक्षा निर्यात को 50 हज़ार करोड़ रुपये तक पहुँचाना है।

रक्षा मंत्री ने स्पष्ट किया कि वित्त वर्ष 2026‑27 में हमारा कुल रक्षा बजट 7 लाख 85 हज़ार करोड़ रुपये हो गया है। इसमें आधुनिकीकरण और पूंजी खरीद के लिये 2 लाख 19 हज़ार करोड़ रुपये का पूंजी परिव्यय निर्धारित किया गया है। यह हमारी सोच को दर्शाता है, जिसके तहत सशस्त्र बलों की आवश्यकताओं को पूरा करने के साथ-साथ भारतीय उद्योगों और घरेलू विनिर्माण को भी प्रोत्साहित किया जा रहा है। हमने आधुनिकीकरण बजट को साल दर साल बढ़ाया है और उसी के अनुसार खर्च भी किया है। हमारा उद्देश्य केवल आधुनिक उपकरण हासिल करना नहीं, बल्कि एक ऐसा डिफेंस इकोसिस्टम तैयार करना है, जिसमें हमारी सेना की क्षमताओं के अनुरूप तकनीक का विकास हो, भारतीय उद्योग की भागीदारी बढ़े और देश की अर्थव्यवस्था पर निर्भरता घटे।

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