वाशिंगटन। अमेरिका के मध्यावधि चुनाव में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी को बड़ा झटका लगा है। डेमोक्रेटिक पार्टी ने प्रतिनिधि सभा और सीनेट, दोनों सदनों में बहुमत हासिल कर लिया है। इस जीत के साथ डेमोक्रेट्स ने ट्रंप प्रशासन के लिए कार्यकाल के अगले दो वर्षों में विधायी फैसलों को आगे बढ़ाना मुश्किल कर दिया है।
चुनाव परिणामों के अनुसार, डेमोक्रेट्स ने कई ऐसे राज्यों में भी महत्वपूर्ण जीत दर्ज की है, जहां रिपब्लिकन पार्टी की स्थिति मजबूत मानी जाती थी। टेक्सास, साउथ कैरोलिना, आयोवा और कंसास जैसे राज्यों में मिली सफलता ने डेमोक्रेटिक पार्टी की बढ़त को निर्णायक बनाने में अहम भूमिका निभाई। प्रतिनिधि सभा में भी डेमोक्रेट्स ने दो दर्जन से अधिक सीटों पर बढ़त हासिल की है।
इस चुनाव में प्रतिनिधि सभा की सभी 435 सीटों, सीनेट की 35 सीटों और 36 राज्यों के गवर्नर पदों के लिए मतदान हुआ। तीन नवंबर को हुए मतदान के बाद मतगणना शुरू हुई और शुरुआती नतीजों के साथ ही कई राज्यों में डेमोक्रेटिक उम्मीदवारों की बढ़त सामने आने लगी। बाद के परिणामों ने कांग्रेस के दोनों सदनों में पार्टी की जीत की पुष्टि की।
सीनेट के चुनाव में डेमोक्रेट्स ने रिपब्लिकन पार्टी के कब्जे वाली कई महत्वपूर्ण सीटें जीत लीं। वहीं, प्रतिनिधि सभा में भी पार्टी ने अपनी स्थिति मजबूत करते हुए बहुमत हासिल किया। इन नतीजों को ट्रंप की नीतियों के प्रति मतदाताओं की नाराजगी और उनकी सरकार के कामकाज पर जनमत संग्रह के तौर पर देखा जा रहा है।
चुनाव में महंगाई, जीवनयापन की बढ़ती लागत, ईरान के साथ युद्ध और प्रशासन से जुड़े भ्रष्टाचार के आरोप प्रमुख मुद्दे रहे। इन मुद्दों ने रिपब्लिकन पार्टी के खिलाफ मतदाताओं की नाराजगी बढ़ाने में भूमिका निभाई।
कांग्रेस के दोनों सदनों में बहुमत मिलने के बाद डेमोक्रेट्स को ट्रंप प्रशासन के विधायी एजेंडे पर अंकुश लगाने, उनकी नियुक्तियों को रोकने और प्रशासन के कामकाज की जांच कराने का अवसर मिलेगा। हालांकि, राष्ट्रपति ट्रंप के पास कानूनों पर वीटो का अधिकार बना रहेगा।
