
असम सरकार, जो भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व में चल रही है, ने राज्य में अतिक्रमण और घुसपैठ के खिलाफ शून्य सहिष्णुता नीति अपनाई है। मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत बिस्व सरमा के निर्देशन में, 2026 के जनवरी से नवंबर तक असम के कई जिलों में बड़े पैमाने पर अभियान चलाये गये।
शहर: गुवाहाटी, 04 नवंबर (प्रेस ब्यूरो)। असम सरकार ने धुबड़ी, नगांव, होजाई, गोलाघाट और शिवसागर जिलों में सरकारी और आरक्षित वन भूमि से हजारों परिवारों को हटाया तथा 4,700 बीघा से अधिक क्षेत्र को खाली कराया। जनवरी माह में होजाई जिले के आरक्षित वन में 1,098 परिवार बेदखल किये गये, जिससे 700 हेक्टेयर भूमि मुक्त हुई।
नवंबर के शुरुआती दिनों में धुबड़ी जिले के आलमगंज (पार्ट‑9) में 650 बीघा सरकारी खास भूमि को खाली कराया गया। उसी महीने गोलाघाट के नेघेरीबिल, दोयांग और नामबोर दक्षिण आरक्षित वन तथा होजाई के जुमुना‑मौदंगा (डबोका इलाका) में भी बुलडोजर के इस्तेमाल से अतिक्रमण हटाया गया। 2026 के अक्टूबर में नगांव के लुटुमारी लोंगजाप आरक्षित वन और बोरपानी वन संभाग में भी बड़ी कार्रवाई हुई, जहाँ 600 से अधिक परिवार हटाए गये और 700 हेक्टेयर के आसपास के क्षेत्र को साफ किया गया।
इन अभियान के दौरान लगभग 1,100 से अधिक परिवार (लगभग 5,000 लोग) विस्थापित हुए, जिनमें नगांव, होजाई और गोलाघाट के दो दिवसीय बड़े कार्यवाही से सबसे अधिक प्रभावित हुए। असम सरकार ने बतौर जवाब में, खाली की गयी जमीन पर नई बागवानी तथा पेड़ लगाने का प्रावधान किया है।
हिमंत बिस्व सरमा के अनुसार, ये कदम राज्य की जमीन को “घुसपैठियों के लिए नहीं, असम के लोगों के लिए है” इस प्रतिज्ञा को साकार करने के लिये हैं, और उन्होंने चेतावनी दी है कि जो लोग इस नियम की अवहेलना करेंगे, उन्हें बुलडोजर से निपटाया जाएगा।
