
नई दिल्ली, 26 अक्टूबर (प्रेस ब्यूरो)। उच्चतम न्यायालय ने दिल्ली दंगों की साजिश रचने के आरोप में जमानत पर रहे शादाब अहमद की वह याचिका खारिज कर दी, जिसमें उसने गाज़ियाबाद में लॉ की पढ़ाई के लिये दिल्ली से बाहर जाने की अनुमति मांगी थी। न्यायालय के सामने यह याचिका पेश करने के बाद, आरोपी के वकील ने इसे वापस ले लिया, जिसके बाद अदालत ने इसे अस्वीकार कर दिया और ट्रायल कोर्ट से संपर्क करने की अनुमति दे दी।
सुनवाई के दौरान जस्टिस अरविंद कुमार की पीठ ने स्पष्ट कहा, “हम इस शर्त में कोई बदलाव नहीं करेंगे।” उन्होंने यह भी नोट किया कि शादाब अहमद ने दिल्ली के सभी लॉ कॉलेजों को छोड़कर गाज़ियाबाद के कॉलेज में दाखिला क्यों लिया, इसका वह स्पष्ट नहीं कर पा रहा है। शादाब के वकील ने तर्क दिया कि उसने दिल्ली विश्वविद्यालय में सीट पाने की कोशिश की, लेकिन अवसर नहीं मिला, इसलिए गाज़ियाबाद के कॉलेज में दाखिला लिया और “सुधार की राह” पर आगे बढ़ना चाहता है।
शादाब ने अपनी याचिका में दो मुख्य जमानत शर्तों में राहत की मांग की थी। पहली शर्त के तहत उसे ट्रायल कोर्ट की अनुमति के बिना दिल्ली से बाहर जाना प्रतिबंधित था, जिसे वह हटाना चाहता था। दूसरी शर्त के अनुसार उसे हफ्ते में दो बार (सोमवार और गुरुवार) दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच में हाजिरी देनी पड़ती थी; वह इसे घटाकर हफ्ते में एक बार करने का प्रस्ताव रखता था।
यह मामला 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) और एनआरसी विरोध प्रदर्शनों के दौरान उभरी हुई सांप्रदायिक हिंसा से जुड़ा है, जिसमें 53 लोगों की मौत और 700 से अधिक लोगों को चोटें आईं। उस दौरान पुलिस ने शादाब अहमद सहित कई छात्र, कार्यकर्ता और अन्य लोगों को “मास्टरमाइंड” बताकर उत्तरीय आतंकवाद विरोधी अधिनियम (UAPA) और भारतीय दंड संहिता की गंभीर धारा के तहत गिरफ्तार किया। पुलिस का आरोप है कि शादाब अहमद दिल्ली प्रोटेस्ट सपोर्ट ग्रुप का सक्रिय सदस्य था। फिलहाल वह जमानत पर ही है, पर कोर्ट ने उसकी याचिका को खारिज कर दिया है।
