
नई दिल्ली, 26 अक्टूबर (प्रेस ब्यूरो)। जियो‑पॉलिटिकल टेंशन और विश्व स्तर पर शेयर‑बाजार में दबाव के बावजूद, अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना की कीमतें परम्परा के विपरीत निरंतर नीचे जा रही हैं। आमतौर पर शेयर‑बाजार की कमजोरी या किसी क्षेत्र में तनाव के समय सोना एवं चांदी के दाम बढ़ते हैं, पर वर्तमान में यह रुझान उलटा दिख रहा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना ने अपने ऑल‑टाइम हाई से लगभग 25 % तक गिरावट दर्ज की है।
इस वर्ष जनवरी में स्पॉट गोल्ड ने तेज़ी से बढ़ते हुए $5,600 प्रति औंस की नई ऊँचाई हासिल की थी, पर मध्य‑पूर्व में तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और विश्व स्तर पर महँगी बढ़ने की आशंकाओं के कारण कई देशों की केंद्रीय बैंकों द्वारा ब्याज‑दर बढ़ाने की संभावनाओं ने सोना की चाल को दबाव में डाल दिया। परिणामस्वरूप, इस वर्ष अब तक सोना की कीमत में 25 % से अधिक की गिरावट आई है और आज भारतीय समय के अनुसार शाम ६ बजे यह $4,018.97 प्रति औंस पर कारोबार कर रहा था।
घरेलू बाजार में भी अंतरराष्ट्रीय रुझानों के समान प्रवृत्ति देखी गई। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर 29 जनवरी को गोल्ड फ्यूचर्स ने ₹1,76,306 प्रति 10 ग्राम का सर्वकालिक उच्च स्तर छू लिया था, पर बाद में लाभ‑निवृत्ति के कारण कीमतें गिर गईं। वर्तमान में एमसीएक्स पर दिसंबर डिलीवरी वाला गोल्ड वायदा ₹1,42,024 प्रति 10 ग्राम पर थोड़ी स्थिरता दिखा रहा है, जबकि हाजिर सर्राफ़ा बाजार में कीमतें ₹1,42,500 से ₹1,45,436 के बीच चल रही हैं।
कमोडिटी मार्केट विशेषज्ञ मयंक मोहन का कहना है कि वैश्विक स्तर पर अमेरिकी डॉलर की मजबूती और बॉन्ड यील्ड में निरंतर उछाल ने ग्लोबल मार्केट में गैर‑यील्ड संपत्तियों जैसे सोना की धारण लागत बढ़ा दी है, जिससे कीमतों पर दबाव बना है। कच्चे तेल की कीमत में आज 2 % से अधिक की गिरावट से महँगी की चिंताएँ कुछ कम हुई हैं। निवेशक इस सप्ताह आने वाले फ़ेडरल रिज़र्व के नीति निर्णय पर करीबी नज़र रखे हुए हैं, जिससे सोना की दिशा तय होगी। विशेषज्ञों का तर्क है कि निवेशकों को बड़े‑पैमाने पर एकमुश्त खरीद‑बिक्री से बचना चाहिए और प्रत्येक गिरावट के समय छोटे‑छोटे हिस्सों में निवेश करने की रणनीति अपनानी चाहिए।
