
उज्जैन, 26 अक्टूबर (प्रेस ब्यूरो)। मध्य प्रदेश के उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग भगवान महाकालेश्वर मंदिर में इस सोमवार, अर्थात् अश्विन शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि (शरद पूर्णिमा) को आयोजित भस्म आरती के दौरान बाबा महाकाल को विशेष पंचामृत पूजन‑अभिषेक कर राजा स्वरूप में सजा‑सँवारा गया। इस दिव्य स्वरूप को सैकड़ों श्रद्धालुओं ने दर्शन किया।
मंदिर के मुख्य पुजारी पंडित महेश शर्मा ने बताया कि भस्म आरती के लिये सुबह चार बजे पट खोलकर प्रथम घंटा बजाया गया। इसके बाद पुजारी‑पण्डे ने गर्भगृह में स्थापित सभी देवताओं का पूजन किया और भगवान महाकाल को जल‑अभिषेक कर पंचामृत से स्नान कराया। पंचामृत में दूध, दही, घी, शक्कर और फलों के रस शामिल थे। अभिषेक के पश्चात चंदन, वैष्णव तिलक तथा विभिन्न आभूषणों से भगवान को राजा स्वरूप में अलंकृत किया गया।
प्रथम घंटा बजने के बाद मंत्रोच्चार के साथ भगवान का ध्यान कर हरिओम् जल अर्पित किया गया। कपूर आरती के बाद भगवान के मस्तक पर भांग, चंदन और त्रिपुंड लगाया गया। शृंगार पूरा होते ही ज्योतिर्लिंग को वस्त्र से ढँक कर भस्म से रमाया गया। तत्पश्चात भगवान को शेषनाग का रजत मुकुट, चांदी की मुंडमाल तथा रुद्राक्ष की माला अर्पित की गई। मोगरे और गुलाब की सुगंधित पुष्पों से भी अलंकार किया गया। अंत में फल‑मिष्ठान का भोग लगाया गया।
भस्म आरती में बड़ी संख्या में भक्त शामिल हुए और महानिर्वाणी अखाड़ा की ओर से भी भस्म अर्पित किया गया। मान्यता के अनुसार, भस्म अर्पित होने के बाद भगवान महाकाल निराकार से साकार रूप में प्रकट होते हैं और श्रद्धालुओं को आशीर्वाद देते हैं।
