
नैनीताल, 26 अक्टूबर (प्रेस ब्यूरो)। दीपावली के दौरान बाजारों में रंग-बिरंगी मोमबत्तियों की मांग बढ़ रही है। इस बीच, हल्द्वानी के पॉलीशीट क्षेत्र की हेमा कौशिक ने अपनी हस्तनिर्मित मोमबत्तियों के माध्यम से एक प्रेरक आत्मनिर्भरता की कहानी बयां की है।
ललित कला में दक्ष हेमा ने अपने कौशल को व्यावसायिक रूप दिया और ग्लो निर्वाणा कैंडल्स नाम से अपना उद्यम शुरू किया। स्थानीय परंपरा को आधुनिक डिजाइन के साथ जोड़ते हुए, उन्होंने सोया वैक्स, मधुमक्खी के मोम और पर्ल वैक्स से बनी जार कैंडल्स, फ्लोटिंग कैंडल्स, दिया कैंडल्स, पिलर कैंडल्स और फूलों व मोतियों से सजी अनोखी रचनाएँ तैयार की हैं।
प्रमुख प्रेरणा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “आत्मनिर्भर भारत” और “वोकल फॉर लोकल” के मंत्र रहे। एमएसएमई विभाग के कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रमों और मार्गदर्शन से मिले समर्थन ने हेमा को अपनी कलात्मक प्रतिभा को व्यवस्थित व्यवसाय में बदलने में मदद की।
उत्पादों की बिक्री के लिये हेमा ने स्थानीय मेलों, एमएसएमई स्टॉलों और बाजारों के साथ-साथ फेसबुक व इंस्टाग्राम जैसे डिजिटल प्लेटफार्मों का सहारा लिया। इस बहु-चैनल दृष्टिकोण से वह स्थानीय ग्राहकों के साथ-साथ अन्य संभावित खरीदारों तक पहुँच पाती हैं।
उन्हें इस उद्यम से लगभग 25,000 से 30,000 रुपये की शुद्ध मासिक आय हो रही है, जिससे वे अपनी आर्थिक जरूरतें पूरी कर रही हैं और व्यवसाय को आगे बढ़ा रही हैं। इस उद्यम ने तीन अन्य महिलाओं या स्थानीय लोगों को भी रोजगार दिया है, जिससे यह सिर्फ व्यक्तिगत आजीविका से आगे जाकर स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन का माध्यम बन गया है।
नवरात्र, दीपावली और क्रिसमस जैसे पर्वों पर सजावटी और सुगंधित मोमबत्तियों की मांग में वृद्धि होने की संभावना है, और प्राकृतिक मोम से बने उत्पादों की लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है।
हेमा की कहानी यह दर्शाती है कि जब स्थानीय हुनर को सही प्रशिक्षण, बाजार तक पहुँच और लगातार मेहनत के साथ जोड़ा जाए, तो वह एक ठोस आजीविका का आधार बन सकता है। यह उत्तराखंड की रचनात्मक क्षमता और छोटे उद्यमियों के सशक्तिकरण की संभावनाओं को उजागर करती है, जो स्थानीय उत्पादों के समर्थन से स्वयं को और अपने समुदाय को सशक्त बना सकते हैं।
