
कोलकाता, 26 अक्टूबर (प्रेस ब्यूरो)। पश्चिम बंगाल के औद्योगिक परिदृश्य में एक महत्वपूर्ण परिवर्तन के तहत पुरुलिया के रघुनाथपुर क्षेत्र को एक बड़े रक्षा विनिर्माण हब में बदल दिया जाएगा। राज्य सरकार ने जंगल सुंदरी कर्मनगरी फेज‑2 औद्योगिक पार्क में जुपिटर डिफेंस प्राइवेट लिमिटेड को लगभग 256 एकड़ भूमि आवंटित की है, जहाँ पहला बड़ा एकीकृत रक्षा विनिर्माण परिसर स्थापित किया जाएगा। यह परियोजना भारत सरकार के सरकारी आयुध कारखाने से अलग, निजी क्षेत्र की पहल है।
23 सितंबर को कोलकाता के मिलन मेला प्रांगण में आयोजित भूमि आवंटन समारोह में मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने उपस्थिति दर्ज की और जुपिटर वैगन्स के चेयरमैन एमेरिटस मुरारी लाल लोहिया को दस्तावेज़ सौंपे। इस परिसर को इंटीग्रेटेड एम्युनिशन मैन्युफैक्चरिंग एंड फिलिंग कॉम्प्लेक्स कहा गया है, जहाँ गोला‑बारूद का उत्पादन से लेकर उसकी भराई तक का काम एक ही स्थल में किया जाएगा। इसे बंगाल के गैर‑जहाज निर्माण क्षेत्र में पहला निजी रक्षा विनिर्माण प्रोजेक्ट माना गया है और इसे तीन साल के भीतर पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
परियोजना के परिणामस्वरूप प्रत्यक्ष रोजगार के साथ‑साथ परिवहन, सुरक्षा, रख‑रखाव और सेवा क्षेत्रों में अप्रत्यक्ष नौकरी के अवसर भी उत्पन्न होंगे। स्थानीय सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME) को पुर्ज़ा निर्माण, पैकेजिंग, मशीनिंग और लॉजिस्टिक्स के क्षेत्र में नए व्यापार अवसर मिलेंगे। तकनीकी प्रशिक्षण के लिए आईटीआई एवं पॉलिटेक्निक संस्थानों को उद्योग के साथ सीधा जोड़ने की संभावना भी बढ़ेगी।
रघुनाथपुर‑2 ब्लॉक के रुकनी इलाके में वाम शासन के दौरान आवंटित इस जमीन पर अब रक्षा उद्योग स्थापित होने से स्थानीय लोगों में खुशी का माहौल बन गया है। इस सफलता से राज्य के अन्य औद्योगिक पार्कों में निवेशकों और आपूर्तिकर्ताओं की रुचि बढ़ेगी, जिससे पूर्वी भारत में बंगाल को रक्षा विनिर्माण का प्रमुख केंद्र बनाने की दिशा में गति मिलेगी।
राष्ट्रीय स्तर पर यह परिसर देश की रक्षा आवश्यकताओं को घरेलू स्तर पर पूरा करने में अहम भूमिका निभाएगा। वित्त वर्ष 2025‑26 में भारत का कुल रक्षा उत्पादन ₹1,78,000 करोड़ तक पहुंचा, जिसमें निजी क्षेत्र का हिस्सा लगभग 24 % (₹42,000 करोड़) था। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस हिस्से को 50 % तक बढ़ाने का लक्ष्य रखा है, और यह एकीकृत परिसर उस लक्ष्य में योगदान देगा। रक्षा विशेषज्ञ सत्यम सिंह ने कहा कि एक ही परिसर में निर्माण और भराई दोनों होने से आपूर्ति श्रृंखला सुगम रहती है और आपातकालीन स्थितियों में सशस्त्र बलों को उच्च गुणवत्ता वाला आयुध मिल पाता है। उन्होंने आगे बताया कि भारत का रक्षा निर्यात वर्तमान में ₹38,424 करोड़ पर है और निजी कंपनियों के प्रवेश से 2028‑29 तक ₹10,000 करोड़ निर्यात का लक्ष्य संभव हो सकता है।
उद्योग मंत्री तापस रॉय के अनुसार, राज्य में 23 सितंबर को आवंटित कुल 33 परियोजनाओं में लगभग ₹60,000 करोड़ का निवेश और 62,000 नौकरियों का सृजन होगा, जिससे बंगाल के सुस्त पड़े औद्योगिक विकास को नई गति मिलेगी।
