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पानी को तरसेगा पाकिस्तान, भारत बनाएगा 2 बड़ी सुरंग


नई दिल्‍ली। पाकिस्तान के साथ सिंधु जल समझौते को स्थगित करने के साल भर बाद भारत ने पाकिस्तान को जाने वाले अधिकतम पानी को रोकने के लिए दो बड़ी टनल परियोजनाओं की तैयारी कर ली है। दोनों परियोजनाएं लंबी अवधि वाली हैं और उनके पूरा होने में काफी समय लगेगा, लेकिन इनके पूरा होने पर पाकिस्तान को जाने वाला अधिकतम पानी को हमेशा के लिए भारत रोक सकेगा। इससे इस पानी के गंगा बेसिन में पहुंचने का रास्ता भी बन जाएगा।

सिंधु जल समझौते के तहत सिंधु बेसिन की छह नदियों में तीन संधु, चिनाब और झेलम के पानी के अस्सी फीसद का अधिकार पाकिस्तान व ब्यास,रावी, सतलुज के अस्सी फीसदी पानी पर भारत का अधिकार था, लेकिन भारत ने पहलगाम के आतंकी हमले के बाद इसे स्थगित कर हालात बदल दिए हैं।

भारत के पानी के अधिकार वाली तीनों नदियों के देश में पानी के उपयोग की ढांचा पहले से ही तैयार है । दूसरी तरफ पाकिस्तान को ज्यादा पानी देने वाली तीनों नदियों पर समझौते के चलते कई काम रुके पड़े थे। अब बीते एक साल से इन तीनों नदियों के पानी के भारत में अधिकतम इस्तेमाल पर काम हो रहा है, लेकिन पानी को रोकना इतना आसान काम भी नहीं है।

पानी रोकने व छोड़ने के समय को प्रभावित तो किया जा सकता है, लेकिन हमेशा के लिए अधिकतम पानी के लिए ढांचा तैयार करने में समय लगेगा। चेनाब के पानी को ब्यास में लाने व सलाल बांध की गाद निकालने के लिए नेशनल हाइड्रोइलेक्ट्रिक पावर कॉरपोरेशन की इन दोनों परियोजनाओं की कुल लागत लगभग 2600 करोड़ रुपये है।
दूसरी परियोजना में 268 करोड़ रुपये खर्च होंगे

दूसरी परियोजना में रियासी जिले में स्थित सलाल हाइड्रोइलेक्ट्रिक परियोजना पर लगभग 268 करोड़ रुपये खर्च आएगा। यहां एक नया डायवर्जन-कम-सेडिमेंट बाईपास टनल बनाया जाएगी। पहाड़ों से बहकर आने वाली मिट्टी के कारण सलाल में गाद जमा हो चुकी है। इससे जल भंडारण क्षमता घटकर पांच फीसद रह गई है।
8.7 किलोमीटर लंबी टनल बनाई जाएगी

2352 करोड़ रुपये की चिनाब-ब्यास लिंक परियोजना के तहत लगभग 8.7 किलोमीटर लंबी एक टनल बनाई जाएगी। पहले चरण में लाहौल घाटी में नदी पर एक 19 मीटर ऊंचा बराज बनाया जाएगा। इससे चंद्रा नदी के पानी को हाइड्रोलिक स्ट्रक्चर और टनल की मदद से ब्यास बेसिन की तरफ मोड़ा जाएगा।

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