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वैश्विक संकट के बीच दुनिया के अन्य देशों के मुकाबले भारत में बढ़े पेट्रोल-डीजल के दाम

नई दिल्ली। वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों (Global Crude Oil Prices) में तेज उछाल के बीच दुनिया के कई देशों में पेट्रोल और डीजल की कीमतों (Petrol Diesel Prices ) में भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। हालांकि भारत (India) में ईंधन की कीमतों में अपेक्षाकृत कम बढ़ोतरी हुई है। सरकारी तेल कंपनियों ने करीब 76 दिनों बाद पेट्रोल और डीजल के दामों में चरणबद्ध तरीके से बढ़ोतरी की है। भारत में पेट्रोल की कीमत में करीब 4.74 रुपये प्रति लीटर और डीजल में 4.82 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी हुई। सरकार का दावा है कि वैश्विक संकट और कच्चे तेल के दाम बढ़ने के बावजूद भारत में आम लोगों पर कम बोझ डाला गया है।


दुनिया के मुकाबले भारत में कितनी कम बढ़ी कीमतें?
तेल वितणन कंपनियों इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम ने पेट्रोल और डीजल की कीमतों में करीब 5 फीसदी की वृद्धि की है। वहीं कई देशों में यह बढ़ोतरी बहुत ज्यादा रही। म्यांमार में पेट्रोल की कीमतों में लगभग 90 प्रतिशत और डीजल में 112 प्रतिशत से ज्यादा बढ़ोतरी दर्ज की गई। मलयेशिया में पेट्रोल 56 प्रतिशत और डीजल 71 प्रतिशत तक महंगा हुआ। पाकिस्तान में पेट्रोल की कीमत करीब 55 प्रतिशत और डीजल 45 प्रतिशत तक बढ़ गया। सरकार का कहना है कि भारत ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में उतार-चढ़ाव के बावजूद कीमतों को काफी हद तक नियंत्रित रखा।


विकसित देशों में हालात कितने गंभीर हैं?
अमेरिका और यूरोप जैसे विकसित देशों में भी ईंधन की कीमतों में बड़ी बढ़ोतरी देखी गई। अमेरिका में पेट्रोल की कीमतों में लगभग 44.5 प्रतिशत और डीजल में 48.1 प्रतिशत की वृद्धि हुई। ब्रिटेन में पेट्रोल 19 प्रतिशत और डीजल 34 प्रतिशत से ज्यादा महंगा हो गया। फ्रांस में पेट्रोल की कीमतों में करीब 21 प्रतिशत और डीजल में 31 प्रतिशत तक बढ़ोतरी दर्ज की गई। विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिमी एशिया में जारी तनाव और वैश्विक कच्चे तेल बाजार में अस्थिरता की वजह से दुनिया भर में ईंधन महंगा हुआ है।


रुपये की गिरावट पर पीयूष गोयल ने क्या कहा?
पीयूष गोयल ने डॉलर के मुकाबले रुपये में गिरावट को लेकर कहा कि सरकार विनिमय दरों में सीधे हस्तक्षेप नहीं करती। उन्होंने कहा कि रुपये की कीमत बाजार की ताकतों और वैश्विक परिस्थितियों से तय होती है। गोयल के मुताबिक सरकार का फोकस निर्यात बढ़ाने, आयात पर निर्भरता घटाने और भारत में निवेश को प्रोत्साहन देने पर है। उन्होंने यह भी कहा कि पिछले दो-तीन दिनों में रुपया फिर मजबूत हुआ है और यह बाजार की सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा है।


वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों और पश्चिमी एशिया की स्थिति पर आगे भी नजर बनी रहेगी। अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल महंगा होता है तो भारत में भी ईंधन की कीमतों पर असर पड़ सकता है। हालांकि सरकार फिलहाल कीमतों को नियंत्रित रखने की कोशिश में जुटी हुई है ताकि आम लोगों पर अतिरिक्त बोझ न पड़े।

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