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एआई में नवाचार से नेतृत्व की ओर बढ़ता भारत

एआई में नवाचार से नेतृत्व की ओर बढ़ता भारत

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शहर, 09 जनवरी (प्रेस ब्यूरो)। लेखक: LN Star News वर्ष 2026 के आरंभ में भारत एक ऐसे निर्णायक दौर में प्रवेश कर चुका है, जहाँ कृत्रिम बुद्धिमत्ता देश की तकनीकी दिशा तय करने वाला प्रमुख आधार बन रही है। यह परिवर्तन किसी एक नीति, संस्था या कंपनी का परिणाम नहीं है। यह भारत की सामूहिक बौद्धिक शक्ति, युवाओं की उद्यमशील सोच और एक स्पष्ट राष्ट्रीय दृष्टि का परिणाम है। जिस वैश्विक एआई प्रतिस्पर्धा में भारत कुछ वर्ष पहले तक दर्शक की भूमिका में माना जाता था, उसी मंच पर आज वह अग्रणी दावेदार के रूप में उभर रहा है। वस्तुत: स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी की ग्लोबल एआई वाइब्रेंसी रिपोर्ट में भारत का सातवें स्थान से सीधे तीसरे स्थान पर पहुँचना इस बदलाव का ठोस प्रमाण है। अमेरिका और चीन के बाद भारत का नाम आना यह दर्शाता है कि भारतीय प्रतिभा, स्टार्टअप संस्कृति और तकनीकी सोच अब वैश्विक स्तर पर गंभीरता से ली जा र...
भारत में वामपंथी वैचारिकी, विश्वविद्यालयी आंदोलन और नक्सली समर्थन

भारत में वामपंथी वैचारिकी, विश्वविद्यालयी आंदोलन और नक्सली समर्थन

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शहर, 09 जनवरी (प्रेस ब्यूरो)। लेखक: LN Star Newsभारत का लोकतंत्र अपनी विविधता, मतभिन्नता और खुली बहस की परंपरा के कारण विश्व में विशिष्ट रहा है। किंतु पिछले दो दशकों में एक ऐसी वैचारिक धारा विकसित हुई है, जिसने विश्वविद्यालयों, वामपंथी छात्र संगठनों, शहरी बुद्धिजीवी समूहों और माओवादी हिंसा को व्यापक वैचारिक सूत्र में पिरो दिया है। यह विमर्श केवल छात्र-राजनीति या असहमति तक सीमित नहीं; यह राज्य-विरोध, पहचान की राजनीति, ‘क्रांतिकारी प्रतिरोध’ की संस्कृति और अंततः माओवादी सशस्त्र संघर्ष तक फैला सुनियोजित नैरेटिव बन चुका है। सबसे स्पष्ट उदाहरण दिल्ली के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय- जेएनयू और जामिया मिल्लिया इस्लामिया तथा हैदराबाद एवं कलकत्ता विश्वविद्यालय हैं, जहाँ विमर्श का झुकाव धीरे-धीरे राष्ट्रीय दृष्टिकोण से हटकर एक प्रकार के वैचारिक अराजकवाद की ओर दिखाई देता है। जेएनयू में एसएफआई, एआईएसए, डी...
वैश्विक मंच पर हिंदी

वैश्विक मंच पर हिंदी

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शहर, 09 जनवरी (प्रेस ब्यूरो)। लेखक: LN Star News भारत की सांस्कृतिक चेतना की समृद्ध विरासत हिंदी न केवल हमारी अस्मिता की पहचान है वरन हमारे राष्ट्र की आत्मा भी है। अब हिंदी केवल परस्पर संवाद और संपर्क का माध्यम ही नहीं है वरन वैश्विक स्तर पर भी अपनी सर्जनात्मकता, जिजीविषा और समावेशिता के कारण अपने प्रभुत्व का निरंतर विस्तार कर रही है। विश्व हिंदी दिवस (10 जनवरी) पर विशेष इसलिए विश्व में हिंदी प्रयोक्ताओं की संख्या लगभग 100 करोड़ से अधिक हो गई है। पहले अंग्रेजों के साम्राज्य में सूर्य कभी अस्त नहीं होने का मिथक था जो इतिहास बन गया किंतु अब हिंदी के लिए गर्व का विषय है कि उसके बोलने, समझने और लिखने वालों का संसार इतना विराट हो गया कि वहाँ कभी सूर्य अस्त नहीं होता। भारतीय प्रतीकों और राष्ट्रवाद की प्रखरता को मुखरता के साथ प्रस्फुटित करने वाली हिंदी को अंतरराष्ट्रीय भाषा के रूप में स्थाप...
विकास की नई ऊंचाइयां छूने को तैयार मध्य प्रदेश

विकास की नई ऊंचाइयां छूने को तैयार मध्य प्रदेश

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जगदीश देवड़ा मध्य प्रदेश अपनी स्थापना की 70वीं वर्षगांठ मना रहा है। सभी नागरिकों को बधाई और शुभकामनाएं। देश के नागरिकों के लिए यह शुभ अवसर है। उत्साह और उल्लास के साथ यह अवसर देश की उपलब्धियों पर गर्व करने का है। आज उन सभी महान विभूतियों को याद करने का भी अवसर है, जिन्होंने मध्य प्रदेश के निर्माण में अपना योगदान दिया। आज हम इस बात को दृढ़ आत्मविश्वास के साथ कह सकते हैं कि मध्य प्रदेश अब पूरी तरह से बदल चुका है। अब और अधिक ऊंचाइयां तय करने के लिए तैयार है। मध्य प्रदेश के सामने 2047 तक विकसित भारत के निर्माण का लक्ष्य है। भारत के अमृतकाल में मध्य प्रदेश ने भी अपने महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय किए हैं। वर्ष 2047 तक 2 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था का निर्माण करना सर्वोच्च लक्ष्य है। इसे हासिल करते हुए मध्य प्रदेश स्वयं भी पूर्ण रूप से विकसित राज्य बन जाएगा। अर्थव्यवस्था की दृष्टि से मध्य ...
मध्यप्रदेश में निवेश, नवाचार और रोज़गार के संकल्प का अभ्युदय

मध्यप्रदेश में निवेश, नवाचार और रोज़गार के संकल्प का अभ्युदय

मध्य प्रदेश, लेख
डॉ. मोहन यादव मध्यप्रदेश आज अपनी स्थापना के 70वें वर्ष में प्रवेश कर रहा है। एक नवंबर 1956 को अस्तित्व में आये मध्यप्रदेश में विकास की नई यात्रा विगत दो दशकों से आरंभ हुई, जो प्रदेश को देश में अग्रणी राज्य बनाने की संभावनाओं तक पहुंच गई है। यह सुखद संयोग है कि आज देवउठनी ग्यारस के पावन अवसर पर राज्योत्सव का आयोजन किया जा रहा है। हमारे तीज, त्यौहार और परंपराएं हमारी संस्कृति का आधार हैं। उत्सव के आनंद से ही भविष्य निर्माण के भाव निर्मित होते हैं। मुझे यह बताते हुए प्रसन्नता है कि प्रदेश में सभी त्यौहारों को व्यापक स्वरूप में मनाया जा रहा है। अपने त्यौहारों का सांस्कृतिक संदर्भ ही हमें पुरातन से नूतन की प्रेरणा देता है। हमारे लिए गर्व की बात है कि भारत का ह्दय मध्यप्रदेश वन, जल, अन्न, खनिज, शिल्प, कला, संस्कृति, उत्सव और परंपराओं से समृद्ध है। हमें मां नर्मदा, चंबल, पार्वती, शिप्रा...
क्या ट्रंप नोबेल में मात के बाद भी शांति दूत बने रहेंगे?

क्या ट्रंप नोबेल में मात के बाद भी शांति दूत बने रहेंगे?

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ऋतुपर्ण दवे बड़बोले डोनाल्ड ट्रंप को नोबेल पुरस्कार नहीं मिला। अपने मुंह मियां मिट्ठू बनने वाले ट्रंप हाथ मलते रह गए। शांति के नोबेल के लिए चंद देशों से खुद को नामित कराने वाले अड़ीबाज अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रप के मुकाबले बेहद कम चर्चित और दुनिया में अलग पहचान रखने वाली एक महिला को मिलना शायद ट्रंप को उनकी असलियत या औकात बताने को काफी है। वैसे भी हर पुरस्कार के लिए नियम होते हैं, लंबी फेहरिस्त होती है और कारण होते हैं। ट्रंप कहीं से भी इसमें फिट नहीं बैठते थे। लेकिन उन्हें अमेरिका का राष्ट्रपति होने का गुमान था। इसीलिए वो यह जानते हुए भी कि पुरस्कार के लिए नामित होने और औपचारिकताओं के पूरा करने की प्रक्रिया को भी शायद अपनी धौंस से धता बताने की जुगाड़ में थे, जो हो न सका। यह भी सच है कि शायद यह पहला मौका होगा जब पुरस्कार मिलने वाले के नाम की चर्चा के बजाए न मिलने वाले का नाम और उसका रंज सु...
बड़ा मायने है पर्यटन में मध्‍य प्रदेश का वैश्‍विक रूप से हृदय जीत लेना !

बड़ा मायने है पर्यटन में मध्‍य प्रदेश का वैश्‍विक रूप से हृदय जीत लेना !

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डॉ. मयंक चतुर्वेदी मध्य प्रदेश ने पिछले कुछ वर्षों में जिस तरह पर्यटन के क्षेत्र में अपनी सशक्त पहचान बनाई है, वह नीतियों और प्रचार अभियानों के साथ दृष्टि और निरंतरता का प्रतीक है। भारत के हृदय में स्थित यह प्रदेश आज देश-विदेश के यात्रियों के लिए भरोसे और अनुभव दोनों का केन्द्र बन गया है। महामारी के बाद जब वैश्विक पर्यटन उद्योग पुनर्जीवन की राह खोज रहा था, तब मध्यप्रदेश ने योजनाबद्ध ढंग से अपनी साख दोबारा कायम की। पर्यटन के हर आयाम में यहां नई हलचल दिख रही है। कभी विरासत और वन्यजीव के लिए पहचाने जाने वाला यह प्रदेश आज वेडिंग, एमआईसीई, फिल्म और ग्रामीण पर्यटन जैसे क्षेत्रों में देशव्यापी अग्रणी भूमिका निभा रहा है। भोपाल में हुए एमआईसीई एवं वेडिंग टूरिज्म सम्मेलन में देशभर के विशेषज्ञों ने माना है कि मध्यप्रदेश आयोजनों का नया केन्द्र बनकर उभर रहा है। इसका एक बड़ा कारण यह है कि राज्य भौ...
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से संबंध और अलौकिक अनुभव

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से संबंध और अलौकिक अनुभव

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लेफ्टिनेंट जनरल (रिटायर्ड) विष्णु कांत चतुर्वेदी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने विजयादशमी के पावन पर्व पर अपनी एक शताब्दी की यात्रा पूरी कर ली है। हम सब ने बहुत कुछ जाने-अनजाने में इस संस्था के कार्य और उनकी संरचना के बारे में सुना है या फिर स्वयं भी किसी न किसी रूप में अनुभव किया है। मेरा भी इस संगठन से जुडाव कुछ इसी प्रकार हुआ। मैं 31 मई 2011 को भारतीय सेना से सेवानिवृत्त हुआ। तब तक, मैने इस संगठन के बारे में केवल अखबारों में, पत्रिकाओं में या फिर कभी किसी राजनीतिक चर्चाओं में सुना था। मैं अब यह कह सकता हूं कि एक ऐसा संगठन जिसने अपने आप को केवल मानवता और राष्ट्र को समर्पित कर दिया, मैं स्वयं सेना की नौकरी में कार्यान्वित होने के कारण इस संगठन के उत्कृष्ट कार्यो से अनभिज्ञ रहा। ऐसा भी नहीं, कि मैंने अपने सेना के सेवाकाल में, इस संगठन के कार्यों का अनुभव नहीं किया, लेकिन कभी ध्यान ही नह...
घोष केवल संगीत और वादन नहीं, यह साधना है

घोष केवल संगीत और वादन नहीं, यह साधना है

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नितिन गर्गे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का जब भी पथ संचलन निकलता है, तब घोष उसका सौंदर्य बढ़ाता है। संघ कार्य का यह शताब्दी वर्ष है। इन 100 वर्षों में जिस प्रकार संघ का क्रमिक विकास हुआ है, उसी प्रकार संघ के घोष का भी क्रमिक विकास हुआ है। दिसंबर, 1926 में जब संघ का पहला पथ संचलन निकला था, तब घोष में केवल एक आनक और एक शंख ही शामिल हुआ था। घोड़े पर चढ़कर पहले सरसेनापति मार्तंड राव जोग आगे चलते थे तथा पीछे बिगुल वादक एवं स्वयंसेवक संचलन करते थे। विगत 100 वर्षों में यह यात्रा घोष की बड़ी और समृद्ध इकाई तक पहुँच गई है। घोषदल की इकाई में पणव (बास ड्रम), आनक (साइड ड्रम), शंख, वंशी, झल्लरी (झांझ), ट्राइंगल (त्रिभुज ), नियंत्रण और संकेत के लिए घोषदंड शामिल रहता है। आरएसएस का मत है कि घोष केवल संगीत का माध्यम नहीं, बल्कि यह वीरता, पराक्रम और राष्ट्रनिर्माण की भावना का प्रतीक है। शंख, ढोल और रणभेर...
गहन चोट से शब्दों का अभाव

गहन चोट से शब्दों का अभाव

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हृदयनारायण दीक्षित राष्ट्र स्तब्ध है। देश की सर्वोच्च न्यायपीठ के मुख्य न्यायाधीश पर जूता फेंके जाने की घटना से जन गण मन आहत है। हालांकि मुख्य न्यायाधीश ने अब तक घटना पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी थी। अब उन्होंने कहा है कि, ”जो कुछ हुआ उससे बहुत स्तब्ध था।” मुख्य न्यायाधीश ने यह भी कहा कि उनके सहयोगी न्यायमूर्ति उज्जवल भुइयां ने इससे भिन्न राय प्रकट की है। यह अच्छी बात है कि मुख्य न्यायाधीश ने इसे एक भुला दिया गया अध्याय बताया है, लेकिन देश में इस घटना पर अच्छी खासी बहस है। भुइयां ने कहा है, “इस पर मेरी अपनी राय है। वह भारत के चीफ जस्टिस हैं। यह उच्चतर संस्था का अपमान है।” राष्ट्रीय स्तर पर चर्चित इस घटना ने कई दिशाओं में नया सोचने की आवश्यकता प्रकट की है। घटना की गंभीरता का पता इसी बात से चलता है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने भी घटना की न...