
रायपुर, 07 नवंबर (प्रेस ब्यूरो)। राज्यपाल रमेन डेका ने आज एक बैठक में कहा कि जिला खनिज न्यास (डीएमएफ) की उपलब्ध राशि का प्रयोग खनन प्रभावित क्षेत्रों के समग्र विकास और वहाँ के निवासियों के जीवन स्तर में सुधार के लिए किया जाना चाहिए। इसके अंतर्गत पर्यावरण प्रदूषण को नियंत्रित करना पहली प्राथमिकता होगी, साथ ही शिक्षा, स्वास्थ्य और अधोसंरचना के विकास पर भी विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए। उन्होंने बताया कि सतत विकास के लिये पर्यावरण संरक्षण आवश्यक है और इसके लिए सुनियोजित कार्ययोजना तैयार करने के साथ ही पर्यावरणविदों का सहयोग लेना ज़रूरी है।
राज्यपाल ने गुरुवार को लोक भवन में डीएमएफ की गतिविधियों, खनन प्रभावित क्षेत्रों में विकास कार्यों तथा आगामी पाँच वर्षों की कार्ययोजना पर आयोजित बैठक में संबोधित करते हुए कम से कम दो वर्ष का रोडमैप तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने ज़ोर दिया कि खनन प्रभावित क्षेत्र में प्रदूषण नियंत्रण के लिये डीएमएफ से आवश्यक कार्य किए जाएं और उद्योगों से चर्चा कर पर्यावरणीय मानकों और निर्धारित दिशा‑निर्देशों का पालन सुनिश्चित किया जाए। पर्यावरण संरक्षण के कार्यों को अभियान के रूप में संचालित करने पर उन्होंने बल दिया।
राज्यपाल ने नदियों से रेत उत्खनन के संदर्भ में वैज्ञानिक और पर्यावरण अनुकूल तरीकों को अपनाने की आवश्यकता बताई, कहते हुए “रेत रहेगी तो पानी रहेगा, और पानी रहेगा तो रेत रहेगी।” उन्होंने रेत खदानों में वैज्ञानिक तरीके से उत्खनन हेतु विशेष अभियान चलाने की बात भी कही। साथ ही कलेक्टरों को निर्देशित किया कि वे आम जनता से संवाद करें और उनकी आवश्यकताओं व प्राथमिकताओं को समझें, ताकि डीएमएफ की कार्ययोजना उसी अनुरूप तैयार की जा सके। प्रशासन को जनता के साथ संवाद बनाए रखने और कार्यों की प्रगति की समीक्षा हेतु नियमित बैठकों का आयोजन करने को कहा।
राज्यपाल ने यह भी कहा कि डीएमएफ के माध्यम से खनन प्रभावित क्षेत्रों में सामाजिक कल्याण और विकास कार्यों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए और शासन की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ पात्र हितग्राहियों तक पहुँचाना सुनिश्चित किया जाए। विशेष रूप से प्रधानमंत्री आवास योजना के आवासों को प्राथमिकता से पूर्ण कराने के निर्देश भी दिए। उन्होंने बस्तर क्षेत्र में डीएमएफ के माध्यम से विकास कार्यों को सर्वेच्च प्राथमिकता देने का निर्देश दिया और उन लोगों के लिये योजनाएँ तैयार करने पर जोर दिया जो मुख्यधारा में लौट आए हैं। इसके अलावा उन्होंने विशेष पिछड़ी जनजातियों के स्वास्थ्य और जीवनशैली में सुधार हेतु चिकित्सा शिविर और जागरूकता कार्यक्रम चलाने का निर्देश भी दिया।
