
उज्जैन, 07 नवंबर (प्रेस ब्यूरो)। मध्य प्रदेश के उज्जैन में स्थित विश्व‑प्रसिद्ध महाकालेश्वर मंदिर में गुरुवार शाम को अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष राविंद्र पुरी महाराज को दर्शन के दौरान असहज स्थिति का सामना करना पड़ा। मंदिर प्रोटोकॉल के अनुसार उन्हें चांदी गेट से प्रवेश कर देहरी से दर्शन करने की व्यवस्था थी, परंतु प्रवेश द्वार पर सुरक्षा कर्मियों ने “मोबाइल जांच” का हवाला देते हुए उन्हें रोक दिया। समझाने के बावजूद उनका प्रवेश अनिश्चितकाल तक टाल दिया गया और कई मिनटों तक इंतजार कराया गया, जिससे उन्हें अभद्र व्यवहार का आरोप लगाने को मजबूर होना पड़ा।
राविंद्र पुरी महाराज ने कहा, “जब मंदिर में साधु‑संतों के साथ ऐसा बर्ताव किया जा रहा है तो आम श्रद्धालुओं की स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है।” उन्होंने यह भी कहा कि मंदिर के कुछ कर्मचारी नियमित रूप से संतों के साथ दुर्व्यवहार करते हैं और उन्होंने सम्बंधित कर्मचारी का नाम अधिकारियों को प्रदान किया है, साथ ही उन कर्मचारियों को तुरंत हटाने की मांग की।
घटना के बाद विकास प्राधिकरण अध्यक्ष रवि सोलंकी स्थल पर पहुँचे, राविंद्र पुरी महाराज से पूरी जानकारी ली और मंदिर प्रशासक को फोन पर शिकायत दर्ज करने का आदेश दिया। राविंद्र पुरी महाराज ने इस मामले को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के समक्ष ले जाने और दिल्ली में भी शिकायत दर्ज करने का इरादा जताया।
उन्हें यह भी आशंका है कि आगामी नासिक कुंभ मेले के दौरान बड़ी भीड़ को संभालते समय यदि ऐसे ही दुर्व्यवहार की घटनाएँ दोहराई गईं तो मंदिर की छवि को गंभीर नुकसान पहुँच सकता है। उन्होंने कुंभ के दौरान “दर्शन व्यवस्था को कुछ लोग अपना धंधा बना रहे हैं” और “अधिकारी मनमानी की छूट से व्यवस्था बिगड़ रही है” कहा।
घटना के समय मंदिर में कोई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित नहीं था। स्थल पर केवल आईएएस अधिकारी, डिप्टी कलेक्टर और जनसंपर्क अधिकारी के रूप में तैनात तहसीलदार स्तर के अधिकारी मौजूद थे, लेकिन प्रोटोकॉल के अनुरूप वरिष्ठ अधिकारी की अनुपस्थिति ने प्रशासनिक प्रबंधन पर प्रश्न उठाए।
