
नई दिल्ली, 07 अक्टूबर (हि.स.)। दीपावली से पहले धनतेरस के अवसर पर पूरे देश में खरीद‑फ़रोख्त की लहर दौड़ी। सोने‑चांदी के आभूषण, मोबाइल‑फ़ोन, टेलीविज़न, कपड़े, मिठाइयाँ तथा सजावटी वस्तुओं की बिक्री में तीव्रता देखी गई। इस साल दिल्ली में व्यापार का आंकड़ा 1 लाख करोड़ रुपये को पार कर चुका है, जबकि राष्ट्रीय स्तर पर 6 लाख करोड़ रुपये से अधिक का कारोबार हो गया है।
व्यापारियों के संघ कॉन्फेडरेशन ऑफ़ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) ने शनिवार को जारी बयान में कहा कि यह आंकड़ा जल्द ही 7 लाख करोड़ रुपये तक पहुँच सकता है। उन्होंने दिल्ली के व्यापारियों की ओर से दिल्लीवासियों को दिल से धन्यवाद कहा, यह कहते हुए कि इस वर्ष उपभोक्ताओं ने उत्साह, विश्वास और बड़ी संख्या में बाजारों में भागीदारी की, जिससे व्यापारिक माहौल में नई ऊर्जा आई है।
कैट के राष्ट्रीय महामंत्री व सांसद प्रवीण खंडेलवाल ने कहा कि दिल्लीवासियों ने न केवल व्यापारियों की आर्थिक गतिविधियों को नई गति दी, बल्कि राहुल गाँधी की एक नवंबर की रैली और पिछले महीने से चल रहे धरनों‑प्रदर्शनों के कारण हुए नुकसान के बीच एक सकारात्मक संदेश भी दिया। उन्होंने बताया कि “धन्यवाद दिल्ली” केवल नारा नहीं, बल्कि लाखों व्यापारी, दुकानदार, रेहड़ी‑पटरी वाले, दिहाड़ी मजदूर और छोटे उद्यमियों की कृतज्ञता का वास्तविक स्वर है।
खंडेलवाल ने यह भी रेखांकित किया कि ग्राहकों ने भारतीय उत्पादों को प्राथमिकता देना शुरू कर दिया है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के “वोकल फॉर लोकल”, “आत्मनिर्भर भारत” और स्वदेशी अपनाने के आह्वान का प्रभाव बाजारों में स्पष्ट दिखाई दे रहा है। सोने‑चांदी के आभूषण, इलेक्ट्रॉनिक्स, फैशन, पूजा‑सजावट, मिठाइयाँ, फर्नीचर, खिलौने, ऑटोमोबाइल तथा हस्तशिल्प जैसे कई वर्गों में भारी माँग देखी गई।
कैट ने कहा कि इस विशाल व्यापार से छोटे‑मझोले व्यापारी, रेहड़ी‑पटरी वाले, दिहाड़ी मजदूर, लघु एवं कुटीर उद्योग, स्वयं‑सहायता समूह, महिला उद्यमी, कारीगर, परिवहन व लॉजिस्टिक्स सेक्टर के लाखों लोग प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष लाभ प्राप्त कर रहे हैं। विशेष रूप से महिला स्वयं‑सहायता समूहों और स्थानीय कारीगरों को अपने उत्पादों के लिए विस्तृत बाजार मिल रहा है, जिससे रोजगार सृजन और पारिवारिक आय में मजबूती आ रही है।
खंडेलवाल ने कहा कि पिछले एक महीने में राजनीतिक रैलियों, धरनों और प्रदर्शनों के कारण व्यापारियों को हुए नुकसान को केवल कुछ दिनों की खरीदारी से पूरी तरह नहीं भरा जा सकता, परंतु दिल्लीवासियों की उत्सुकता ने व्यापारियों का मनोबल बढ़ाया है। उन्होंने सभी नागरिकों से अपील की कि आगामी त्यौहारों में भी स्थानीय बाजारों से खरीदारी जारी रखें, भारतीय उत्पादों को प्राथमिकता दें और छोटे‑व्यापारियों एवं कारीगरों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने में योगदान दें।
