
नई दिल्ली, 07 नवंबर (प्रेस ब्यूरो)। घरेलू शेयर बाजार ने लगातार छठे कारोबार दिन पर जबरदस्त तेज़ी देखी। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का सेंसेक्स सत्र के दौरान 2,100 अंक से अधिक उछला, जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी लगभग तीन महीने के बाद फिर से 24,500 के मनोवैज्ञानिक स्तर को पार कर गया। इस बड़ी उछाल से लॉर्ज‑कैप के चुनिंदा शेयरों में निरंतर खरीदारी जारी रही, और मिड‑कैप व स्मॉल‑कैप सूचकांकों ने भी मजबूती के साथ अंत किया। धानतेरस के एक दिन पहले आई इस बम्पर गति ने एक ही दिन में निवेशकों की पूंजी में सात लाख करोड़ रुपये से अधिक का इजाफ़ा दर्ज करवा दिया। इसके साथ ही, बाजार की अस्थिरता को मापने वाला इंडिया वीआईएक्स 2.5 % बढ़कर 15.57 पर पहुंच गया, जो अल्पकालिक वोलैटिलिटी के खतरे को संकेतित करता है।
मार्केट विशेषज्ञों का मानना है कि इस तेज़ी के पीछे पाँच बड़े कारक हैं। पहला कारण अमेरिकी चुनाव के मध्यावधि परिणाम हैं, जहाँ राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की रिपब्लिकन पार्टी को कड़ी हार मिली और डेमोक्रेटिक पार्टी ने कांग्रेस दोनों सदनों पर पूर्ण नियंत्रण हासिल किया। विशेषज्ञ कहते हैं कि यह परिणाम ट्रम्प की मध्य‑पूर्व में ईरान के साथ संभावित सैन्य कदमों को रोक देगा, जिससे जियो‑पॉलिटिकल तनाव घटेगा और भारतीय व विदेशी निवेशकों में विश्वास बढ़ेगा।
दूसरा प्रमुख कारक अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में ऐतिहासिक गिरावट है। चुनाव‑परिणाम के बाद रात‑बाजार में कच्चे तेल के दाम 8 % तक गिरकर ब्रेंट क्रूड लगभग $95 और अमेरिकी डब्ल्यूटीआई $88 के आसपास पहुँचे, जो मई के बाद से सबसे बड़ी एक‑दिन गिरावट है और भारत जैसे आयात‑निर्भर देश को लाभ पहुँचा रही है।
तीसरा, अमेरिकी ट्रेजरी बॉण्ड के 10‑वर्ष और 2‑वर्ष यील्ड में क्रमशः 4.86 % और 4.56 % तक तेज़ गिरावट आई, जिससे उभरते बाजारों में विदेशी फंड्स का प्रवाह बढ़ा।
चौथा, घरेलू स्तर पर एफआईआई की निरंतर खरीदारी ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। पिछले चार सत्रों में विदेशी संस्थागत निवेशकों ने कुल ₹20,834 करोड़ की शुद्ध लिवाली की, जिसमें सबसे बड़ी खरीदारी अमेरिकी चुनाव के बाद हुई। सेबी की प्रस्तावित लॉन्ग‑टर्म कैपिटल गेंस टैक्स में छूट भी विदेशी निवेशकों के भरोसे को पुनः स्थापित कर रही है।
पाँचवां कारण सेक्टोरल फ्रंट पर ऑटोमोबाइल और बैंकिंग सेक्टर का जबरदस्त प्रदर्शन रहा। निफ्टी ऑटो इंडेक्स 4 % से अधिक बढ़ा, जबकि सरकारी और निजी दोनों बैंकिंग इंडेक्स में 3 % से अधिक की तेज़ी दर्ज हुई, जिससे मुख्य सूचकांकों को उच्च स्तर पर बंद किया गया।
