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अटारी‑वाघा बॉर्डर के रास्ते पाकिस्तान लौटा 49 सिख श्रद्धालुओं का जत्था

अमृतसर, 06 नवंबर (प्रेस ब्यूरो)। पाकिस्तान से भारत में धार्मिक यात्रा पर आए 49 सिख श्रद्धालुओं का जत्था अटारी‑वाघा बॉर्डर के रास्ते अपने वतन लौट आया। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के हस्तक्षेप के बाद श्रद्धालुओं को सड़क मार्ग से पाकिस्तान लौटने की विशेष अनुमति प्रदान की, जिससे उन्हें महंगे हवाई यात्रा खर्च से राहत मिली। इस समूह में पेशावर, पंजा साहिब, लाहौर और ननकाना साहिब के श्रद्धालु शामिल थे।

जम्मू‑कश्मीर के पहलगाम में 22 अप्रैल 2024 को हुए आतंकी हमले के बाद 1 मई 2025 से अटारी‑वाघा सीमा सामान्य यात्रियों के लिए बंद है। वर्तमान में केवल निर्धारित धार्मिक अवसरों पर भारत‑पाकिस्तान के बीच 1974 के धार्मिक तीर्थयात्रा प्रोटोकॉल के तहत श्रद्धालुओं को आने‑जाने की अनुमति दी जाती है।

पाकिस्तानी सिख श्रद्धालु 8 अक्टूबर को लाहौर‑ताशकंद‑नई दिल्ली हवाई मार्ग से भारत पहुंचे थे। उनका वीज़ा 6 नवंबर को समाप्त होना था और मूल योजना के अनुसार वे हवाई मार्ग से वापसी करेंगे। डीएसजीएमसी के मुख्य सलाहकार (एनआरआई मामलों) परमजीत सिंह चंडोक ने इस वापसी के लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय से विशेष अनुमति और आवश्यक सुविधाओं का अनुरोध किया था।

जत्थे के प्रमुख पपिंदर सिंह ने भारत और पाकिस्तान दोनों सरकारों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि दुनिया भर के सिख उन ऐतिहासिक गुरुद्वारों को देखना चाहते हैं, जो 1947 के विभाजन के बाद सीमा के दूसरी ओर रह गए। उन्होंने बताया कि यात्रा के दौरान उन्होंने श्री हरमंदिर साहिब में श्री गुरु रामदास जी के प्रकाश पर्व समारोह में भाग लिया। लगभग 40 श्रद्धालुओं ने उत्तराखंड स्थित गुरुद्वारा श्री हेमकुंड साहिब का भी दर्शन किया।

धार्मिक स्थल‑दर्शन में गुरुद्वारा बंगला साहिब, रकाब गंज साहिब, सीस गंज साहिब सहित कई ऐतिहासिक गुरुद्वारों में माथा टेका, साथ ही आनंदपुर साहिब स्थित तख्त श्री केसगढ़ साहिब और अमृतसर के श्री हरमंदिर साहिब में भी हाजिरी भरी। जत्थे के कई सदस्य भारत में रहने वाले रिश्तेदारों से भी मिले।

पपिंदर सिंह ने कहा कि अटारी‑वाघा सड़क मार्ग से वापसी की अनुमति मिलने से यात्रा बहुत आसान और किफायती हुई। श्रद्धालुओं ने अपने वापसी के हवाई टिकट रद्द कर दिए हैं और अब टिकटों की राशि की वापसी की उम्मीद कर रहे हैं। परमजीत सिंह चंडोक ने बताया कि इस्तेमाल न किए गए हवाई टिकटों की राशि लौटाने के लिए प्रयास जारी हैं।

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