
नई दिल्ली, 05 नवंबर (हि.स.). सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को तिरुपति ‘लड्डू’ में घी मिलावट के आरोपों से संबंधित सुनवाई को आंध्र प्रदेश के बाहर स्थानांतरित करने की याचिकाओं को खारिज कर दिया। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत के अध्यक्षता वाली बेंच ने मालगंगा मिल्क एंड एग्रो प्रोडक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड के प्रबंध निदेशक मछिंद्र शांताराम लंके द्वारा दायर सभी याचिकाओं को नकार दिया।
लंके की ओर से पेश वरिष्ठ वकील सिद्धार्थ दवे ने तर्क दिया कि राजनीतिक नेताओं के लगातार बयान देने से स्वतंत्र और निष्पक्ष सुनवाई के लिए माहौल बिगड़ रहा है। दवे ने कहा, “यह मामला अब एक राजनीतिक मुद्दा बन चुका है। राज्य में माहौल तनावपूर्ण है, मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री लगातार इसपर टिप्पणी कर रहे हैं।” उन्होंने यह भी बताया कि फॉरेंसिक रिपोर्ट में घी में पशु वसा की उपस्थिति को नकार दिया गया था, फिर भी नेता बयान दे रहे हैं।
मुख्य न्यायाधीश ने दवे की बात सुनते ही कहा, “हमने अपने आदेश से उन सभी को चुप करा दिया है। यदि आगे कोई समस्या उत्पन्न होती है, तो आप सीधे हमारे पास आ सकते हैं।”
4 अक्टूबर 2024 को सुप्रीम कोर्ट ने तिरुपति लड्डू में पशु वसा के उपयोग के आरोपों की जांच के लिए पाँच सदस्यीय एसआईटी का गठन किया था। इस समिति में सीबीआई निदेशक द्वारा नियुक्त दो अधिकारी, दो राज्य पुलिस अधिकारी और एक एफएसएसएआई अधिकारी शामिल थे। न्यायालय ने कहा कि इस कदम का उद्देश्य करोड़ों लोगों की भावनाओं को शांत करना और न्याय को राजनीतिक मंच में बदलना नहीं है।
इस प्रकार, सुप्रीम कोर्ट ने अपनी स्वतंत्रता और निष्पक्षता को कायम रखते हुए मामले की सुनवाई को राज्य के भीतर ही रख कर आगे की कार्यवाही जारी रखने का निर्देश दिया।
