
नई दिल्ली, 06 नवंबर (प्रेस ब्यूरो)। सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को दायर एक जनहित याचिका पर केन्द्र सरकार, आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय तथा ग्रामीण विकास मंत्रालय को चार हफ्तों के भीतर उत्तर देने का निर्देश दिया। यह याचिका 82 वर्षीया व्हीलचेयर उपयोगकर्ता और सुगमता कार्यकर्ता प्रकाश नारायण अंधारे द्वारा दायर की गई थी, जिसमें उन्होंने दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 के अनिवार्य पहुंच मानकों को लागू करने की मांग की है।
याचिकाकर्ता ने कहा कि जब तक कोई आवासीय इमारत या हाउसिंग कॉम्प्लेक्स इन मानकों को पूरा नहीं करता, तब तक उसे निर्माण अनुमति या पूर्णता प्रमाण पत्र नहीं जारी किया जाना चाहिए। वर्तमान में कई नए हाउसिंग कॉम्प्लेक्स में संकरे दरवाज़े और दुर्गम शौचालय स्थापित हैं, जिससे दिव्यांग व्यक्ति अपने ही घर में स्वतंत्र रूप से नहीं रह पाते। दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 की धारा 2(एक्स) के अनुसार “आवास” सार्वजनिक सुविधा में गिना गया है, इसलिए यह प्रावधान निजी तथा सरकारी दोनों प्रकार के प्रोजेक्ट्स पर लागू होना चाहिए।
इसके अतिरिक्त याचिका में यह भी उजागर किया गया कि प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY-U 2.0) में दिव्यांगों के लिए 5 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान है। यदि इन घरों को सुलभ नहीं बनाया गया तो आरक्षण का मूल उद्देश्य विफल हो जाएगा। न्यायालय ने इस मामले को पहले से लंबित मुख्य सुगमता मामले राजीव रतूड़ी बनाम भारत संघ के साथ जोड़ने का निर्देश दिया, जिससे देश भर में एक समान राष्ट्रीय नीति लागू की जा सके। इस आदेश के बाद, संबंधित मंत्रालयों ने नियत समय में विस्तृत जवाब देने की प्रतिबद्धता जताई है।
