
धमतरी, 05 नवंबर (प्रेस ब्यूरो)। छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोकसंस्कृति, परंपरा और आस्था का प्रतीक गौरा-गौरी पर्व शहर में उमंग और उल्लास के साथ आरम्भ हो गया है। बुधवार की रात से विभिन्न वार्डों में इस उत्सव की चहल-पहल देखने को मिली। शीतलापारा और हटकेशर समेत निकटवर्ती ग्रामीण क्षेत्रों में गौरा-गौरी को जाग्रत करने की पारम्परिक रस्में विधिवत् संपन्न हुईं। इस दौरान पारम्परिक गीतों और लोकवाद्यों की मधुर ध्वनि से माहौल भक्तिमय बन गया।
गौरा-गौरी पर्व को छत्तीसगढ़ के प्राचीन लोकपर्वों में विशेष स्थान प्राप्त है और इसे भगवान शिव तथा माता पार्वती के प्रति अटूट श्रद्धा, प्रेम और समर्पण का प्रतीक माना जाता है। आरंभिक पूजा‑अर्चना में बैगा ने चावल अर्पित कर अनुष्ठान का प्रारम्भ किया। इसके पश्चात् महिलाएँ पारम्परिक गौरा-गौरी गीत और मंगल गीत गाकर देवताओं को जाग्रत करने की रस्म निभाई। गीतों के माध्यम से भगवान शिव एवं माता पार्वती को आव्हान किया गया। वहीं पारम्परिक वादकों ने दमऊ, सींग बाजा, ढोल, गुदुम, मोहरी और मंजीरा जैसे गंडवा वाद्ययंत्रों की मधुर धुनें बजाकर उत्सव की चिंगारी को और तेज किया। देर रात तक ये लोकगीत और वाद्ययंत्रों की स्वर लहरियाँ गूंजती रही।
शीतलापारा वार्ड में भागीरथी नेताम, लोकेश नेताम, चंदू मांडवी, संतराम कोर्राम, धर्मेन्द्र सोरी, सेवक मांडवी, लक्ष्मीनारायण, किरण नेताम और मोहित मंडावी सहित कई अन्य लोग उत्साहपूर्वक इस अनुष्ठान में भाग ले रहे हैं। इस पर्व को लेकर मोहल्ले में विशेष उत्साह का माहौल व्याप्त है। गौरा-गौरी केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, यह छत्तीसगढ़ की लोकपरम्पराओं, सामूहिक सहभागिता और सामाजिक सद्भाव का प्रतीक है। ऐसे आयोजन नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों और पारम्परिक विरासत से जोड़ते हैं तथा आपसी भाईचारे, एकता और सामूहिक सौहार्द की भावना को मजबूत करते हैं।
