
भूपेंद्र यादव, केंद्रीय मंत्री एवं भाजपा के वरिष्ठ नेता, ने 5 नवंबर (हिंदीसाल) को पटना में आयोजित पत्रकार वार्ता में कांग्रेस समेत विपक्षी दलों पर “लोकतंत्र के नाम पर भ्रम फैला रहे हैं” और “अराजकता बढ़ा रहे हैं” का आरोप लगाया। उन्होंने बताया कि विपक्ष के थिंक टैंक में राजद और समाजवादी पार्टी के निर्णयों पर “चरमपंथी विचारधारा के लोगों का प्रभाव” बढ़ता जा रहा है।
वह आगे कहते हैं कि “बिहार की धरती लोकतंत्र की प्रेरणादायी भूमि रही है” और जब कांग्रेस ने आपातकाल लगाकर लोकतंत्र कुचलने का प्रयास किया, तब जयप्रकाश नारायण के नेतृत्व में बिहार से ही “लोकतंत्र की रक्षा का संकल्प और संघर्ष” शुरू हुआ। उन्होंने बताया कि बिहार में काम करते हुए उन्होंने “लोकतांत्रिक परंपराओं, विचार‑विमर्श और जनभागीदारी” का महत्व सीखा।
निर्वाचन आयोग के अनुसार, अनुच्छेद 324 और जनप्रतिनिधित्व अधिनियम के तहत निर्वाचन आयोग को मतदाता सूची के पुनरीक्षण का अधिकार है। 1950 से 2024 तक यह प्रक्रिया आठ बार हुई है। भूपेंद्र यादव ने बताया कि बिहार में लगभग 7.89 करोड़ मतदाताओं के लिए घर‑घर जाकर सत्यापन हुआ और राजनीतिक दलों के बूथ‑लेवल एजेंटों को प्रारूप सूची उपलब्ध कराई गई थी।
सर्वोच्च न्यायालय में हुई सुनवाई के दौरान यह सामने आया कि 1.60 लाख बीएलए में से केवल दो आपत्तियाँ दर्ज कराई गईं। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने 89 लाख मतदाताओं के नाम काटे जाने का दावा किया, परंतु निर्वाचन आयोग द्वारा फॉर्म‑7 भरने को कहे जाने के बावजूद कोई आपत्ति दर्ज नहीं हुई। यदि विपक्ष का मतदाता सूची पर वास्तविक आपत्ति थी, तो उसे संवैधानिक प्रक्रिया के तहत सामने आना चाहिए था।
वह यह भी कहते हैं कि विपक्ष चुनाव में जीतने पर “लोकतंत्र की जीत” बताता है और हारने पर “चुनाव प्रक्रिया पर सवाल” उठाता है। Kerala में जीत को लोकतंत्र की जीत बताने वाले दल बिहार और अन्य राज्यों में हारने पर SIR और EVM को दोष देते हैं।
विपक्ष को यदि जनता से जुड़ाव मजबूत करना हो, तो “जनता के विश्वास” से चुनावी परिणाम जुड़ते हैं।
वह लोकतंत्र की रक्षा को भाजपा के “पंच निष्ठाओं” में प्रथम मानते हैं और कहते हैं कि “एक व्यक्ति, एक वोट” तभी प्रभावी होगा जब पात्र नागरिकों को मतदाता सूची में शामिल किया जाए और अपात्र प्रविष्टियों को हटाया जाए।
अवैध घुसपैठ के सवाल पर उन्होंने संविधान के अनुच्छेद 326 के तहत “भारतीय नागरिकता” और “18 वर्ष की आयु” को मतदाता की पात्रता के प्रमुख मानदंड बताया।
पत्रकार वार्ता में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी, बिहार सरकार के मंत्री रामचंद्र प्रसाद, प्रदेश महामंत्री डॉ. प्रीति शेखर, मीडिया संयोजक दानिश इकबाल और प्रवक्ता प्रेम रंजन पटेल भी उपस्थित रहे।
