
चतरा, 04 नवंबर (हि.स.) — भारत में धनतेरस के महापर्व का माहौल गहराने लगा है। इस वर्ष यह पर्व 6 नवंबर, शुक्रवार को मनाया जाएगा। ज्योतिषीय गणना के अनुसार, इस धनतेरस पर कई विशेष ग्रह‑नक्षत्र संयोग बन रहे हैं, जिनमें आयुष्मान योग, प्रदोष काल और शुक्रवार का मिलन शामिल है। इस संयोग को शुभ मानते हुए, विशेषज्ञों का कहना है कि इस दिन की खरीदारी सुख‑समृद्धि तथा ऐश्वर्य में वृद्धि का कारण बनेगी।
आचार्य पंडित चेतन पाण्डेय ने बताया कि आयुष्मान योग के साथ साथ इस वर्ष शुक्र ग्रह का कन्या राशि में गोचर भी विशेष महत्व रखता है। वैदिक ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, शुक्र ग्रह वैभव, भौतिक सुख‑सुविधा और वैवाहिक खुशहाली का प्रतिनिधित्व करता है, जिससे इस अवधि में आर्थिक उन्नति और दांपत्य जीवन में सुख‑समृद्धि की संभावनाएँ बढ़ती हैं। आचार्य ने यह भी कहा कि प्रदोष काल में किए गए खरीदारी के कार्य विशेष रूप से लाभदायक रहेंगे।

आचार्य के अनुसार, इस धनतेरस के विशेष संयोग से पाँच राशि‑वंश के जातकों को विशेष लाभ मिल सकता है:
– मिथुन: प्रेम‑संबंध, शिक्षा और संतान‑सुख में अनुकूल समय, प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता की संभावना।
– सिंह: पारिवारिक जीवन में शांति, घर‑परिवार में सुविधाओं का विस्तार, संपत्ति‑या वाहन‑खरीद के लिए अनुकूल योग।
– तुला: व्यक्तित्व में निखार, आर्थिक स्थिति में मजबूती, कार्यस्थल पर मान‑सम्मान और सामाजिक प्रतिष्ठा में वृद्धि।
– मकर: करियर एवं कारोबार में महत्वपूर्ण अवसर, पदोन्नति के योग, व्यापार में विस्तार के मार्ग खुलते।
– मीन: अचानक धन‑लाभ, पैतृक संपत्ति से लाभ, आर्थिक मामलों में अनुकूल परिस्थितियाँ तथा रुके हुए कार्यों में प्रगति।
धनतेरस पर खरीदारी के समय कुछ वस्तुओं से बचने की भी सलाह दी गई है। आचार्य चेतन पाण्डेय ने कहा कि इस दिन नमक, लोहे की वस्तुएँ और कांटेदार सामान नहीं खरीदना चाहिए, जबकि सोना‑चांदी, बर्तन और अन्य शुभ वस्तुएँ प्रदोष काल में खरीदी जाएँ तो अधिक शुभ माना जाता है। वे यह भी जोड़ते हैं कि उचित मुहूर्त में धन्वंतरि और माता लक्ष्मी की पूजा करने से घर में सुख‑समृद्धि और स्वास्थ्य की प्राप्ति होती है। इस प्रकार, धनतेरस न केवल खरीदारी का अवसर है बल्कि स्वास्थ्य, समृद्धि और शुभता का प्रतीक भी बना रहता है।
