
नई दिल्ली, 05 नवंबर (प्रेस ब्यूरो)। दिल्ली उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार को सार्वजनिक स्वास्थ्य देखभाल बुनियादी ढाँचे में व्यापक सुधार करने के निर्देश जारी किए हैं। जस्टिस प्रतिभा सिंह की अध्यक्षता वाली बेंच ने विशेष रूप से आईसीयू हेल्पलाइन के विस्तार, खाली पड़े प्रशासनिक और चिकित्सा पदों की तेज़ भरपाई तथा 38 सरकारी अस्पतालों में बेकार पड़े उपकरणों के उचित उपयोग को प्राथमिकता देने का निर्देश दिया। अगले सुनवाई की तिथि 17 दिसंबर निर्धारित की गई है।
कोर्ट ने कहा कि कॉल ड्रॉप की समस्या को हर हफ़्ते दूर करने हेतु कैट्स नंबर 102 में 40 सीटों की क्षमता तक पहुँचने के लिये चार हफ़्तों के भीतर 10 नई लाइनें जोड़नी होंगी, जिसमें 24 घंटे अधिकारी व कर्मचारी उपलब्ध रहें। भर्ती प्रक्रिया को तेज करने के लिये 1855 पदों के लिए कार्रवाई करने का आदेश दिया गया, जिसमें संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) के माध्यम से दो हफ़्ते में 645 सामान्य ड्यूटी चिकित्सा अधिकारी और 406 गैर‑शिक्षण कर्मचारी तथा दो महीने में अनुबंध आधारित 804 पैरामेडिकल स्टाफ की नियुक्ति पूरी करनी है।
न्यायालय ने दोहरे चार्ज प्रथा को समाप्त करने के लिये नवंबर 2026 के अंत तक सभी अस्पतालों में पूर्णकालिक निदेशकों की नियुक्ति अनिवार्य कर दी। पाँच प्रमुख अस्पतालों – एलएनजेपी अस्पताल, जीटीबी अस्पताल, दीनदयाल उपाध्याय अस्पताल, जीबी पंत अस्पताल और संजय गांधी अस्पताल – को 30 नवंबर तक बेकार पड़े उपकरणों की सूची तैयार करनी होगी। साथ ही, अधिकारी अनुबंध पर रखे जाने वाले रेडियोलॉजिस्ट के वेतन वृद्धि और आउटसोर्सिंग लागत के मूल्यांकन का भी आदेश दिया गया।
इन निर्देशों के अनुपालन को सुनिश्चित करने के लिये न्यायालय ने प्रत्येक कदम की समय सीमा निर्धारित की है और आगे की प्रगति पर कड़ी निगरानी रखने का आश्वासन दिया है।
