
भोपाल, 05 नवंबर (प्रेस ब्यूरो)। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के इंदौर के डेली कॉलेज परिसर में 2 से 4 नवंबर तक चल रही बुधवार की बैठक में देशभर से लगभग 400 प्रतिनिधियों ने भाग लिया। बैठक के समापन पर कार्यवाहक दत्तात्रेय होसबाले ने पत्रकारों से बातचीत में शताब्दी वर्ष की उपलब्धियों, संगठनात्मक विस्तार, सामाजिक समरसता, आरक्षण, युवाओं की चुनौतियों, आपदा राहत और संघ की भविष्य की योजनाओं का विस्तृत ब्योरा पेश किया। इस दौरान उन्होंने शुद्धि आंदोलन के प्रखर नायक स्वामी श्रद्धानंद के जीवन एवं योगदान पर विशेष वक्तव्य भी प्रस्तुत किया।
उन्होंने कहा, स्वतंत्रता सेनानी, शिक्षाविद्, समाज‑सुधारक, धर्म प्रचारक और शुद्धि आंदोलन के प्रखर नायक स्वामी श्रद्धानंद के बलिदान के 100 वर्ष पूर्ण होने के निमित्त राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ उन्हें आदरपूर्वक स्मरण करता है। पंजाब के जालंधर जिले के तलवन ग्राम में जन्मे स्वामीजी सन्यास‑दीक्षा ग्रहण करने के पश्चात समाज जागरण के विविध कार्यों में जुट गए।

अंग्रेजों द्वारा भारतीय शिक्षा व्यवस्था पर किये जा रहे कुठाराघात का निर्भयता से सामना करने हेतु उन्होंने हरिद्वार क्षेत्र में गुरुकुल कांगड़ी की स्थापना कर उसे भारतीय शिक्षा दृष्टि के आधार पर एक वैकल्पिक शिक्षा संस्था के रूप में विकसित किया। इस संस्था ने भारतीय संस्कृति, वेदों सहित समस्त भारतीय वाङ्मय और आधुनिक समकालीन विषयों के अध्ययन के साथ-साथ स्वतंत्रता आंदोलन में भी उल्लेखनीय सहभागिता दिखाई।
भ्रान्त धारणाओं के कारण पिछड़ी जातियों के लोगों को न केवल केरलम “वैकम” के शिव मंदिर में प्रवेश करने से वंचित रखा गया था, बल्कि मंदिर के चारों ओर के सार्वजनिक मार्गों पर चलने से भी रोका जाता था। इस भेदभाव के विरुद्ध ‘वैकम’ में एक ऐतिहासिक आंदोलन किया गया था, जिसमें स्वामी श्रद्धानंद स्वयं सहभागी हुए। इस महत्त्वपूर्ण कार्य हेतु उन्होंने श्री नारायण गुरु से भी मुलाकात की। सामाजिक कुरीतियों से मुक्ति कार्य में उनकी सक्रियता के कारण भारतरत्न डॉ. बी. आर. आम्बेडकर भी उन्हें सामाजिक और आर्थिक दुर्बल वर्गों का एक महान और सच्चा हितैषी मानते थे।

स्वतंत्रता आंदोलन में समाज जागृति हेतु उन्होंने ‘सद्धर्म प्रचार’, ‘तेज’, ‘वीर अर्जुन’ और ‘लिबरेटर’ नामक पत्र‑पत्रिकाओं का प्रकाशन प्रारम्भ कर अंग्रेजों के झूठ, कपट और षड्यंत्रों को उजागर करते हुए निर्भीक, अडिग और सिद्धांतनिष्ठ पत्रकारिता के प्रतिमान प्रस्तुत किये।
विषम परिस्थितियों, भ्रान्त सामाजिक व धार्मिक मान्यताओं के कारण हिन्दू समाज निरंतर मतान्तरण का शिकार हो रहा था, ऐसे मतान्तरित लोगों की पुनः हिन्दू धर्म में वापसी के द्वार बंद थे। ऐसी परिस्थिति में स्वामी जी ने शुद्धि आंदोलन के माध्यम से मतान्तरित हिन्दुओं को अपने धर्म में वापस लाने का कार्य शुरू किया। मोपला नरसंहार के बाद स्वामी जी ने शुद्धि आंदोलन के द्वारा केरल सहित पूरे देश में हजारों लोगों की घर वापसी करवाई।
पुरुषार्थ और परमार्थ को पूरी प्रखरता और प्रामाणिकता से प्रकट करने के उनके निरंतर प्रयासों के बावजूद 23 दिसंबर 1926 को अब्दुल रशीद नामक एक मतांध व्यक्ति द्वारा दिल्ली में उनकी दुर्भाग्यपूर्ण हत्या कर दी गई। कर्मण्यता के प्रेरणा पुरुष स्वामी श्रद्धानंद जी को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ अपनी भावपूर्ण श्रद्धास
