
रायपुर, 04 नवंबर (प्रेस ब्यूरो)। छत्तीसगढ़ ने वित्तीय वर्ष 2025‑26 में कुल 6 लाख आवास पूरा कर देश में नया कीर्तिमान स्थापित किया है। राज्य सरकार का दावा है कि वर्तमान में प्रतिदिन औसतन 1500‑1600 से अधिक मकानों का निर्माण कार्य पूरा हो रहा है।
प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में आवास‑हीन या कच्चे मकान में रहने वाले परिवारों को पक्के आवास, रसोई‑शौचालय सहित प्रदान करना है। यह केन्द्र‑प्रवर्तित योजना है जिसमें केंद्र 60 प्रतिशत और राज्य 40 प्रतिशत अनुदान देता है। योजना के तहत लक्ष्य एवं राशि निर्धारण भारत सरकार द्वारा किया जाता है।
छत्तीसगढ़ में कार्यान्वयन में कुछ गुणवत्ता‑सम्बंधी कमियों के बावजूद निर्माण गति तेज़ है। 01 अप्रैल 2016 से इस योजना को लागू किया गया, जिसमें 2016‑26 तक केंद्र द्वारा 26,27,223 आवासों का लक्ष्य दिया गया, जिसमें से 24,38,926 आवास स्वीकृत हुए। स्वीकृत आवासों में 9,31,937 अनुसूचित जनजाति, 3 89 154 अनुसूचित जाति, 7,553 अल्पसंख्यक तथा 1,290 विकलांग हितग्राहियों के घर शामिल हैं। वित्तीय वर्ष 2026‑27 में 365,179 आवास का लक्ष्य रखा गया, और सितंबर 2026 तक 20,64,438 आवासों का निर्माण कार्य पूर्ण हो चुका है।

वित्तीय वर्ष 2025‑26 में कुल 30,07,66 आवास निर्माण का लक्ष्य 3117.72 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया, जिसमें 26,25,75 आवास स्वीकृत हो चुके हैं। 30 सितंबर तक 1,14,5,266 आवास पूरा और 12,20,04 आवास निर्माणाधीन रिपोर्ट किया गया। वित्तीय वर्ष 2021‑22 में लक्ष्य अप्राप्त रहा था।
राज्य ने जिलों को ₹2,677.15 करोड़ से अधिक राशि जारी की है। मैदानी क्षेत्रों के पात्र परिवारों को ₹1.20 लाख और पहाड़ी/दुर्गम क्षेत्रों को ₹1.30 लाख की मूल वित्तीय सहायता दी जाती है, साथ ही स्वच्छ भारत मिशन से ₹12,000 और महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार योजना से 90‑95 दिन की मजदूरी भी मिलती है।
नक्सल‑प्रभावित क्षेत्रों में 15,000 परिवारों को आवास लाभ प्रदान किया गया, जिसमें 10,984 पात्रों की सूची में 3,391 को स्वीकृति और 56 आवास पूरा हुआ। जिलों में बलौदाबाजार‑भाटापारा ने 2025‑26 में प्रथम स्थान प्राप्त किया, जबकि सूरजपुर ने 2024‑26 में प्रथम स्थान पर रहा। बिलासपुर ने 5 लाख से अधिक मकान पूरे करने में प्रमुख भूमिका निभाई, साथ ही महासमुंद, बलरामपुर और कोरबा जिले भी उच्च निर्माण संख्या दिखाते हैं।
नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक की रिपोर्ट के अनुसार, ₹3 लाख से अधिक वार्षिक आय वाले कुछ अपात्र व्यक्तियों को भी लाभ दिया गया। कुछ जिलों में भुगतान लेने के बाद निर्माण अधूरा रहने की शिकायतें उठी हैं, जिसके विरुद्ध एफआईआर दर्ज की गई। कांग्रेस‑भाजपा के बीच योजना के आँकड़ों और केंद्र‑राज्य हिस्सों को लेकर बहस जारी है, परंतु वर्तमान में छत्तीसगढ़ में प्रतिदिन 1,600 से अधिक आवास पूरा किया जा रहा है।
