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सुरक्षा चुनौतियों के बीच भारत अपनी सैन्य ताकत को नई धार देने की तैयारी में

जैसलमेर, 04 नवंबर (प्रेस ब्यूरो)। बदलते युद्ध‑परिदृश्य और बढ़ती सुरक्षा चुनौतियों के मद्देनज़र, भारत अपनी सैन्य शक्ति को नई दिशा देने पर काम कर रहा है। इस दिशा‑निर्देश को स्पष्ट करने के लिए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मंगलवार को जैसलमेर में रक्षा मंत्रालय की संसदीय परामर्शदात्री समिति की बैठक का संचालन किया और सैन्य आधुनिकीकरण एवं स्वदेशी रक्षा उत्पादन को सरकार की प्राथमिकता बताया।

उन्होंने बताया कि वित्त वर्ष 2026‑27 के लिए रक्षा बजट में 7.85 लाख करोड़ रुपये तक का वृद्धि की गई है, जिसमें आधुनिकीकरण और पूँजीगत खरीद के लिये 2.19 लाख करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। लक्ष्य है कि आधुनिक हथियार‑प्रणालियों से लैस बलों के साथ घरेलू उद्योग को भी सुदृढ़ किया जाए, जिससे भविष्य की चुनौतियों का सामना भारत में विकसित तकनीक से किया जा सके।

रूस‑यूक्रेन युद्ध और इज़राइल‑ईरान संघर्ष जैसे हालिया घटनाक्रमों ने ड्रोन, मिसाइल और वायु‑रक्षा प्रणालियों की महत्ता को उजागर किया है। इन परिवर्तनों को देखते हुए, सेना को वर्तमान आवश्यकताओं के साथ‑साथ भविष्य के परिदृश्य के लिये भी तैयार किया जा रहा है।

नए संरचनात्मक पहलों में आश्नि ड्रोन प्लाटून शामिल है, जिसका उद्देश्य पैदल सेना को ड्रोन‑आधारित निगरानी एवं सूचना‑संग्रहण की क्षमता देना है। इसी प्रकार भैरव बटालियन को तेज़ प्रतिक्रिया‑क्षमता वाली विशेष इकाई के रूप में विकसित किया जा रहा है, जिससे सीमित क्षेत्र में त्वरित कार्रवाई संभव हो सके। शक्तिबाण रेजिमेंट की अवधारणा तोपखाने को आधुनिक ड्रोन, स्वॉर्म ड्रोन और सटीक मार‑प्रहार प्रणालियों से जोड़ती है, जिससे लक्ष्य पहचान व सटीक हमले की क्षमता बढ़ेगी।

स्वदेशी रक्षा उत्पादन में उल्लेखनीय उछाल आया है: 2014‑15 में लगभग 46,429 करोड़ रुपये का उत्पादन 2025‑26 में लगभग 1.78 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया। इस वृद्धि में छोटे‑मध्यम उद्यमों से लेकर बड़े कंपनियों तक की भागीदारी शामिल है, तथा सार्वजनिक‑निजी सहयोग से तकनीकी विकास और घरेलू उत्पादन को बढ़ावा मिला है।

रक्षा मंत्री ने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा के लिये रणनीतिक स्वायत्तता और स्वदेशी तकनीकी क्षमता अनिवार्य है। उनका मानना है कि भविष्य में भारतीय बलों की जरूरतों के अनुरूप उपकरण देश में ही निर्मित हो सकें, जिससे विदेशी निर्भरता घटेगी। बैठक में रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ, रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह और समिति के सदस्य भी उपस्थित थे। मंत्री ने सभी को प्रस्तुतियों का गहन अध्ययन करने और उपयोगी सुझाव देने का आग्रह किया, तथा आश्वासन दिया कि व्यावहारिक सुझावों को शीघ्र कार्यान्वित किया जाएगा।

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