
लखनऊ, 04 नवंबर (प्रेस ब्यूरो)। समाजवादी पार्टी ( सपा ) की पीडीए को पूरी तरह से एक धोखा बताया गया है, जिसका वास्तविक अर्थ “परिवार विकास अथॉरिटी” है। सत्ता में रहने पर यह केवल अपने जाति‑जाति और रिश्तेदारों को ही प्रमुख मानते हैं, जबकि सत्ता से बाहर रहने पर पिछड़े वर्ग को गुमराह करने के लिये पीडीए का नाटक करते हैं। प्रकाश पाल ने कहा कि सपा सरकार के दौरान पिछड़े वर्ग का हक “सफेदा” बनाकर लूटा गया और राज्य के सभी पिछड़े लोगों को दुख का सामना करना पड़ा।
विधान सभा में सदस्य प्रकाश पाल ने बताया कि जब अखिलेश यादव उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बने, तब उन्होंने एक भी गैर‑यादव पिछड़े नेता को कैबिनेट में शामिल नहीं किया। उन्होंने केवल अपने ही क़ुबले – शिवपाल यादव, पारसनाथ यादव, दुर्गा प्रसाद यादव, बलराम यादव, राम गोविंद चौधरी और अंबिका चौधरी को ही पदस्थापित किया। कुर्मी, लोधी, पाल, चौरसिया, गुर्जर, जाट, हलवाई, स्वर्णकार और ठठेर जैसी अन्य पिछड़ी जातियों से कोई कैबिनेट मंत्री नहीं रहा।
राज्यसभा में भेजे जाने की बारी में भी एक सीट चाचा को, दूसरी धनी को और तीसरी संभावित अपराधी को दी गई, जिससे सपा का नाम लेने से वे अब बचते दिखते हैं। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार में नौकरियों का लूटना, कानून‑व्यवस्था का बिगड़ना और महिलाओं‑बच्चों की स्कूल व बाजार जाने की कठिनाइयाँ स्पष्ट थीं।
सपा‑कांग्रेस गठबंधन को उन्होंने “दो लड़कों की जोड़ी” कहा, जो 2017 में भी साथ आई थी और लगातार हराई जा रही है। भाजपा के ओबीसी मोर्चा को सबसे बड़ा फलदायी पेड़ बताया गया, जो गांव‑गांव जाकर लोगों को सपा सरकार की पिछड़े वर्ग के खिलाफ की गई हरकतों की सूचना देगा।
विपक्ष के वोट‑चोरी के आरोप पर प्रकाश पाल ने कहा कि कांग्रेस खुद “खानदानी वोट चोर” है और इतिहास में सरदार पटेल और इंदिरा गांधी के दौर में भी इस तरह के आरोप रहे हैं। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी भारत‑विरोधी ताकतों से मिलकर अराजकता फैलाने की कोशिश कर रहे हैं, जबकि योगी‑मोदी सरकार देश को निरंतर आगे ले जा रही है।
अंत में उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में बिना पिछड़े वर्ग के कोई चुनावी गणित नहीं है, और आगामी चुनावों में भाजपा 350 से अधिक सीटें जीतकर तीसरी बार प्रचंड बहुमत के साथ सरकार बनायेगी।
