
नई दिल्ली, 03 नवंबर (प्रेस ब्यूरो)। पुलिस मुख्यालय के बाहर सोमवार को हुई प्रदर्शन में दिल्ली पुलिस कर्मियों ने वकीलों को “गुंडा” कहकर आपत्ति जताई, जिस पर वकील संगठनों ने कड़ा एतराज जताया। ऑल इंडिया लॉयर्स यूनियन की दिल्ली इकाई ने सभी जिला अदालतों के बार एसोसोसिएशन के कोऑर्डिनेशन कमेटी से अपील की कि वे पुलिस के कथित कदाचार के लिए जवाबदेही तय करने की प्रक्रिया को कमजोर करने की किसी भी कोशिश के विरुद्ध सख्त रुख अपनाएँ।
रोहिणी कोर्ट बार एसोसिएशन ने आज कोर्ट में वकीलों से न्यायिक कार्य के बहिष्कार का आह्वान किया। देर रात एसीपी मनस्वी वशिष्ठ को निलंबित करने की खबर भी सामने आई। ऑल इंडिया लॉयर्स यूनियन के अध्यक्ष अनिल कुमार चौहान और सचिव संजय कुमार ने बयान देते हुए कहा कि एसीपी मनस्वी वशिष्ठ द्वारा दिया गया बयान “बेहद चिंताजनक” है। वकीलों को “गुंडा” कहना और अदालतों के भीतर पुलिस की “फोर्स” तैनात करने की बात करना “पूरी तरह से निंदनीय” है।
वास्तव में 2 नवंबर को पुलिस मुख्यालय के बाहर एकत्र हुए पुलिसकर्मियों ने शाहदरा पुलिस स्टेशन में हुए झड़प के बाद एसीपी मनस्वी वशिष्ठ और इंस्पेक्टर अरुण कुमार को उनके पुराने पदों पर वापस तैनात करने की मांग की। यह विवाद तब उत्पन्न हुआ जब एक बहस के दौरान वकील ललित बंसल के सिर में गंभीर चोट लगी, जिसके बाद वकीलों ने पुलिस के बर्ताव पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि एसीपी मनस्वी वशिष्ठ ने अपना रिवॉल्वर दिखाकर उन्हें डराया‑धमकाया।
ऑल इंडिया लॉयर्स यूनियन ने कहा कि इन गंभीर आरोपों की एक निष्पक्ष, तटस्थ और समयबद्ध जांच होनी चाहिए। केवल संबंधित अधिकारियों का तबादला कर देना जवाबदेही नहीं देता। पुलिस की वर्दी किसी को कानून से ऊपर नहीं उठाने देती, न ही संस्थागत एकजुटता के नाम पर जांच में बाधा डालने की अनुमति मिलनी चाहिए। यूनियन ने इस घटना को पुलिस की मनमानी और आम नागरिकों, मजदूरों तथा अपने लोकतांत्रिक अधिकारों का प्रयोग कर रहे प्रदर्शनकारियों के खिलाफ सरकारी ताकत के दुरुपयोग के व्यापक संदर्भ में देखे जाने की आवश्यकता पर बल दिया। शांतिपूर्ण विरोध को दबाना और न्याय की मांग करने वाले आंदोलनों को दमन करना, दोनों ही मामलों में पुलिस की जवाबदेही और संवैधानिक स्वतंत्रता की रक्षा आपस में जुड़ी हुई है।
