
नई दिल्ली, 04 नवंबर (प्रेस ब्यूरो)। आज कुछ वकीलों ने कार्यवाहक चीफ जस्टिस नितिन वासुदेव साम्ब्रे की अध्यक्षता वाली बेंच के समक्ष मेंशन करके एसीपी मनस्वी वशिष्ठ के आचरण पर स्वतः संज्ञान लेने की मांग की। बेंच ने इस मांग को ठुकरा कर कहा कि वकीलों को सभी उपलब्ध दस्तावेज़ों के साथ एक पूर्ण याचिका दायर करनी होगी, जिस पर न्यायालय विचार करेगा।
मेंशन के दौरान वकीलों ने अदालत को बताया कि उनके खिलाफ “AK-47 का इस्तेमाल” और “काले कोट के गुंडे” जैसी टिप्पणियाँ की गई थीं। एक वकील ने चीफ जस्टिस से कहा, “आप हमारे मुखिया हैं, अगर आप इस मामले को स्वतः संज्ञान लेते हैं तो हमें तसल्ली मिलेगी।” कोर्ट ने उत्तर दिया कि याचिका दायर करें, फिर वह उस पर विचार करेगी।
यह विवाद 2 नवंबर को उत्पन्न हुआ, जब पुलिस मुख्यालय के बाहर कई पुलिसकर्मियों ने शाहदरा पुलिस स्टेशन में हुई झड़प के बाद एसीपी मनस्वी वशिष्ठ और इंस्पेक्टर अरुण कुमार को उनके पुराने पदों पर वापस तैनात करने की मांग की। झड़प के बाद एक वकील, ललित बंसल, के सिर में गंभीर चोट लगी, जिससे वकीलों ने पुलिस के बर्ताव पर प्रश्न उठाए।
वकीलों ने आरोप लगाया कि एसीपी मनस्वी वशिष्ठ ने अपनी रिवॉल्वर दिखाकर उन्हें डराया‑धमकाया। इन आरोपों के बाद वशिष्ठ को “धमकाने” के आरोप में निलंबित किया गया है। वर्तमान में अदालत ने इस निलंबन को लेकर कोई स्वतः संज्ञान नहीं लिया है और प्रक्रिया के अनुसार याचिका का इंतजार कर रही है।
