
जबलपुर, 26 अक्टूबर (प्रेस ब्यूरो)।
भेड़ाघाट की पक्की संगमरमर की चट्टानों पर बिखरी कला, संस्कृति, सुर और संगीत के रंगों से सजी, 23वाँ नर्मदा महोत्सव अपने दूसरे रविवार की रात समाप्त हुआ। 25 अक्टूबर (हि.स.) को जबलपुर के भेड़ाघाट में, शरद पूर्णिमा की दूधिया रोशनी के नीचे, शास्त्रीय नृत्य, भजन गायन और पारंपरिक वाद्ययंत्र “ढ़ोल-ताशा” के प्रदर्शन ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
रात का मुख्य आकर्षण भारतीय आयडल सीजन‑12 की प्रथम उपविजेता अरुणिता कांजीलाल और प्रसिद्ध पार्श्व गायिका ऋचा शर्मा के भजन और गीतों का प्रस्तुतिकरण था। अरुणिता ने “आई गिरी नंदिनी” से शुरुआत कर “राम सियाराम, सियाराम जय जय राम” की मधुर धुन पर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध किया। इसके बाद उन्होंने “नैना मोरे तरस गये” और “हिरे मोती मैं न चाहूं” जैसे फ़िल्मी व गैर‑फ़िल्मी गीत गाए, साथ ही शास्त्रीय “ठुमरी” और शिव‑भक्ति “कौन हे वो” का भी गायन किया।
ऋचा शर्मा ने “सोनिया वे रांझणा वे” से मंच पर कदम रखा, फिर “जिंदगी में कभी कोई आये न रब्बा” और अन्य गीतों के साथ माहौल को रोशन किया।
सांस्कृतिक संध्या की शुरुआत त्रिभंग कला अकादमी, जबलपुर की कौतुकी उपाध्याय द्वारा “कथा” शैली में शिव स्तुति के नाटकीय प्रस्तुति से हुई। उसके बाद महाराष्ट्र की शिवमुद्रा संस्था के कलाकारों ने “ढ़ोल‑ताशा” की जोशीली धुनें बजाकर उत्साह पैदा किया।
इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि राज्यसभा सांसद सुमित्रा बाल्मीक और नीरज सिंह थे। 23 वर्षों से चल रहे महोत्सव को और भी भव्य और यादगार बनाने के लिए लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह ने वर्चुअली उपस्थित होकर शरद पूर्णिमा की हार्दिक शुभकामनाएँ दीं।
मां नर्मदा के प्रति श्रद्धा और आस्था के साथ, इस महोत्सव ने भेड़ाघाट के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व को उजागर करते हुए पर्यटन को बढ़ावा देने के महत्व को पुनः प्रतिपादित किया।
