
जबलपुर, 26 अक्टूबर (प्रेस ब्यूरो)। मध्य प्रदेश के जबलपुर में मदन महल किले के निकट स्थित ‘बैलेंसिंग रॉक’ प्राकृतिक संतुलन का एक अद्भुत नमूना है। एक विशाल शिलाखंड केवल लगभग छह वर्ग इंच संपर्क के साथ नीचे की चट्टान पर टिका रहता है, फिर भी कई दशकों से अपनी जगह पर स्थिर है। इस चट्टान को भूविज्ञान में ‘पर्च्ड बोल्डर’ कहा जाता है; कठोर शिला के नीचे की नरम चट्टानों के तेज क्षरण से केवल संकरी आधार बचा रहता है। 1935 और 1997 में आए क्रमशः 6.0 एवं 6.5 तीव्रता के भूकंपों ने भी इस संतुलन को नहीं हिलाया, जिससे यह स्थल वैज्ञानिकों और पर्यटकों दोनों के लिए आकर्षण का केंद्र बन गया।
हालांकि, हालिया अतिक्रमण और निर्माण कार्यों ने इस धरोहर को जोखिम में डाल दिया है। सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. पीजी नाजपांडे का दावा है कि 1910 के राजस्व रिकॉर्ड में खसरा नंबर 194 के 30 एकड़ जमीन सरकारी थी, पर अब निजी कब्जे के कारण केवल 0.8 हेक्टेयर सरकारी भूमि बची है। उसी क्षेत्र में लगभग 20 फ़ीट की दूरी पर बहुमंजिला इमारत का निर्माण हो रहा है, जिससे चट्टान के आसपास मशीनों की कंपन और जल निकासी समस्याएँ उत्पन्न हो सकती हैं।
पर्यटन विभाग के क्षेत्रीय प्रबंधक नवीन शर्मा ने बताया कि संरक्षण की जिम्मेदारी पुरातत्व विभाग की है, पर उन्होंने अवैध निर्माण के आरोपों को नकारते हुए कहा कि इस पर कलेक्टर से चर्चा होगी। पुरातत्व विभाग के गाइड राजकुमार ने कहा कि विभाग का अधिकार संग्रहालय तक सीमित है, जबकि धरोहर की देखभाल जिला प्रशासन करता है।
भूवैज्ञानिक विशेषज्ञ मनोहर सिंह उईके ने चेतावनी दी कि निर्माण में उपयोग की जाने वाली बड़ी मशीनों की कंपन चट्टान को अस्थिर कर सकती है और जल जमाव से जमीन की स्थिरता खतरे में पड़ सकती है। नगर निगम के भवन अधिकारी शैलेंद्र सिंह कौरव ने कहा कि उन्हें इस निर्माण की जानकारी नहीं है; यदि शिकायत आती है तो जांच कर उचित कार्रवाई करेंगे।
बैलेंसिंग रॉक न केवल एक पर्यटन स्थल है, बल्कि छात्रों और शोधकर्ताओं के लिए गुरुत्वाकर्षण, गुरुत्व केंद्र और अपक्षय के सिद्धांतों को समझने की जीवित कक्षा भी है। इसलिए, इसके संरक्षण के लिए नियमित देखरेख, स्वच्छता बनाए रखना और अतिक्रमण को रोकना आवश्यक है।
