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चक्रवाती तूफान ‘अर्नब’ का खतरा बढ़ा, तमिलनाडु के सात बंदरगाहों पर तीसरे नंबर का चेतावनी संकेत

चेन्नई, 26 अक्टूबर (प्रेस ब्यूरो)। बंगाल की खाड़ी के दक्षिण‑पूर्वी व मध्य‑पूर्वी भाग में निर्मित चक्रवाती तूफान ‘अर्नब’ निरंतर शक्ति बढ़ा रहा है और लगभग 15 किमी/घंटा की गति से आगे बढ़ रहा है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि 28 अक्टूबर को यह तूफ़ान तट से टकरा सकता है। मौसम विभाग ने बताया कि सोमवार मध्यरात्रि तक यह गंभीर चक्रवाती तूफान में बदलने की संभावना है, इसलिए तमिलनाडु के तटीय जिलों में सतर्कता बढ़ा दी गई है। सात बंदरगाहों पर तीसरे नंबर का तूफ़ान चेतावनी संकेत लगाया गया है, जबकि मछुआरों को समुद्र में जाने से रोकने के निर्देश जारी किए गये हैं।

नागपट्टिनम जिले में अत्यधिक भारी बारिश की संभावना को देखते हुए विभाग ने ऑरेंज अलर्ट जारी किया। साथ ही मयिलादुथुराई, तिरुवारूर, तंजावुर, पुदुकोट्टई और रामनाथपुरम में भी भारी बारिश की आशंका जताई गई। मंगलवार को नीलगिरी, कोयंबटूर, डिंडीगुल, तिरुप्पुर और कन्याकुमारी में मध्यम वर्षा का अनुमान है।

उत्तर‑पूर्वी मानसून के दौरान अर्नब पहला चक्रवाती तूफान है और यह लगातार मजबूत होते हुए सोमवार मध्यरात्रि तक गंभीर चक्रवाती रूप ले सकता है। इस खतरे के मद्देनज़र तमिलनाडु और पुदुचेरी के बंदरगाहों पर चेतावनी संकेतों में परिवर्तन किया गया। पहले नौ बंदरगाहों पर दूसरे नंबर का संकेत था, पर अब चेन्नई, एन्नोर, कत्तुपल्ली, नागपट्टिनम, कुड्डालोर, पुदुचेरी और कराईकल सहित सात बंदरगाहों पर तीसरे नंबर का संकेत लगा दिया गया है। पंबन और तूतीकोरिन पर दूसरा नंबर बरकरार रखा गया।

बंगाल की खाड़ी में अर्नब के सक्रिय होने के बाद तमिलनाडु के मत्स्य पालन एवं मछुआरा कल्याण विभाग ने पूर्वी तटीय क्षेत्रों से मोटर चालित नावों से गहरे समुद्र में मछली पकड़ने वाले मछुआरों को तुरंत तट पर लौटने की सलाह दी और अगले आदेश तक समुद्र में न जाने का निर्देश दिया। पुदुचेरी सरकार ने भी इसी सुरक्षा कारण से मछुआरों के समुद्र में जाने पर प्रतिबंध लगाया।

कोयंबटूर में लगातार भारी बारिश के कारण कई जलाशय भर रहे हैं, जिससे जलभराव से सामान्य जनजीवन प्रभावित हो रहा है। सेल्वा चिंतामणि तालाब से अचानक निकलता जल आसपास के आवासीय इलाकों में घुस गया, जिससे कई घरों में घुटनों तक पानी भर गया। गंदे पानी के मिल जाने से स्वच्छता संबंधी समस्याएँ बढ़ी हैं और संक्रामक रोगों के फैलने का खतरा मंडरा रहा है, विशेषकर बच्चों के लिए।

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