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MP में फर्जी दस्तावेज से बने थे बांग्लादेशियों के भारतीय पासपोर्ट…. एटीएस की जांच में हुए बड़े खुलासे

ग्वालियर। मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) में बांग्लादेशी नागरिकों (Bangladeshi Citizens) को फर्जी तरीके से भारतीय पहचान (Indian Identity) दिलाकर पासपोर्ट (Passport) बनवाने वाले एक बड़े रैकेट का भंडफोड़ हुआ है। एसटीएफ की जांच रिपोर्ट के आधार पर पासपोर्ट विभाग ने 70 संदिग्ध पासपोर्ट में से 31 को निरस्त कर दिया है। इनमें 17 पासपोर्ट ग्वालियर जिले के डबरा से जारी किए गए थे। इन सभी पासपोर्ट में डबरा के सिमरिया स्थित बौद्ध विहार का पता दर्ज था। जांच में एक ही गवाह और एक ही मोबाइल नंबर का इस्तेमाल किए जाने का खुलासा हुआ है। इस मामले में ग्वालियर और भोपाल को फर्जी पासपोर्ट नेटवर्क के प्रमुख केंद्र के रूप में देखा जा रहा है।


एक ही गवाह, एक ही मोबाइल नंबर से दस्तावेज
STF की जांच में सामने आया कि बांग्लादेशी नागरिकों ने अपनी असली पहचान छिपाकर नाम बदले और भारतीय नागरिक होने के फर्जी दस्तावेज तैयार करवाए। इन्हीं जाली दस्तावेजों के आधार पर भारतीय पासपोर्ट हासिल किए गए। पासपोर्ट बनवाने के लिए बौद्ध विहार और मठों के पतों का इस्तेमाल किया गया। जांच एजेंसियों के मुताबिक, इस पूरे फर्जीवाड़े में पंचायत स्तर से लेकर नगर पालिका डबरा तक के कुछ कर्मचारियों की कथित मिलीभगत सामने आई है।


मास्टरमाइंड समेत कई आरोपी गिरफ्तार
इस नेटवर्क के मास्टरमाइंड रियाल चौधरी उर्फ नित्यानंद भिक्षु और उसके तीन बांग्लादेशी साथियों को पुलिस पहले ही गिरफ्तार कर चुकी है। इसके अलावा स्थानीय स्तर पर मदद करने के आरोप में गुलाबराय गौतम, गयाप्रसाद गौतम और भोपाल पासपोर्ट सेवा केंद्र के एजेंट नसीम अख्तर को भी गिरफ्तार किया गया है। जांच एजेंसियों ने इस मामले में 100 से ज्यादा आरोपियों को चिन्हित किया है।


66 मुख्य नेटवर्क से जुड़े, 34 की दस्तावेज बनाने में भूमिका
जांच के मुताबिक, 66 आरोपी मुख्य नेटवर्क से जुड़े हैं, जबकि 34 अन्य की भूमिका भारतीय पहचान संबंधी दस्तावेज तैयार करवाने में सामने आई है। हालांकि, अब तक केवल पांच आरोपियों की गिरफ्तारी की जानकारी सामने आई है। बाकी आरोपियों की तलाश जारी है। आशंका है कि कुछ आरोपी देश छोड़कर इंडोनेशिया, मलेशिया, म्यांमार और चीन जैसे देशों में छिपे हो सकते हैं।


बाकी 39 पासपोर्ट भी होंगे निरस्त
STF अधिकारियों के मुताबिक, 70 संदिग्ध पासपोर्ट में से 31 निरस्त किए जा चुके हैं, जबकि शेष 39 पासपोर्ट निरस्त कराने की प्रक्रिया जारी है। अधिकारियों का कहना है कि निरस्त पासपोर्ट का इस्तेमाल कर विदेश जाने की कोशिश करने पर इमिग्रेशन सिस्टम के जरिए संबंधित व्यक्ति की पहचान कर उसे ट्रैक किया जा सकेगा।


सरकारी दस्तावेजों की सत्यापन प्रक्रिया पर उठे सवाल
इस पूरे मामले ने सरकारी दस्तावेजों की सत्यापन प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर पंचायत से लेकर नगर पालिका और पासपोर्ट सेवा केंद्र तक कथित मिलीभगत के बिना इतनी बड़ी संख्या में फर्जी भारतीय पहचान और पासपोर्ट कैसे जारी हो गए? अब जांच एजेंसियों की नजर फरार आरोपियों और बाकी संदिग्ध पासपोर्ट पर है।

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