
नई दिल्ली, 07 नवंबर (प्रेस ब्यूरो)। सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियों (ओएमसी) ने कर्नाटक सरकार के इस दावे को पूरी तरह से अस्वीकार कर दिया है कि राज्य के कुछ खुदरा पेट्रोल पंपों से प्राप्त नमूनों में इथेनॉल की मात्रा निर्धारित 20 % की सीमा से अधिक, यहाँ तक कि 31 % तक पाई गई है। इन कंपनियों ने कहा कि इस प्रकार के निष्कर्ष स्थापित मानक प्रक्रियाओं और वैध परीक्षणों पर आधारित नहीं हैं।
इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड, भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड ने एक संयुक्त बयान में कहा कि उन्होंने कर्नाटक सरकार द्वारा जारी विज्ञप्ति पर ध्यान दिया है, परन्तु उनकी आपूर्ति में प्रयुक्त ई‑20 पेट्रोल भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) के IS 17021 मानक के अनुरूप है। इस मानक के तहत इथेनॉल‑मिश्रित मोटर गैसोलीन की गुणवत्ता को नियमित रूप से कड़ी जांच से गुजरना पड़ता है।
वित्तीय वर्ष के दौरान, कर्नाटक सरकार ने यह भी कहा था कि कुछ रिटेल आउटलेट्स पर बेचे जाने वाले पेट्रोल में 26 % से 31 % तक इथेनॉल मौजूद है, और कुछ नमूनों में यह मात्रा 31.2 % तक पहुँची थी। इसपर सरकार ने संकेत दिया कि इससे उपभोक्ताओं को माइलेज में गिरावट और वाहन रख‑रखाव पर अतिरिक्त खर्च का सामना करना पड़ सकता है।
इन तथ्यों के प्रकाश में, तेल कंपनियों ने कहा कि वे अपने उत्पाद की गुणवत्ता और सुरक्षा के प्रति प्रतिबद्ध हैं और किसी भी अनधिकृत मिश्रण की पुष्टि करने के लिये स्वतंत्र एवं मान्य प्रयोगशालाओं से दोबारा परीक्षण करवाने के लिए तैयार हैं। उन्होंने यह भी जोड़ा कि यदि कोई असामान्यता पाई जाती है तो वे तुरंत सुधारात्मक कदम उठाएंगे, पर वर्तमान में उपलब्ध डेटा के आधार पर कर्नाटक सरकार के आरोप असमर्थित हैं।
