Saturday, November 7खबर जो असर करे |
Shadow

(संशोधित) उज्जैन में महाकाल के आंगन में पहला दीपोत्सव, गर्भगृह में फुलझड़ी जलाएंगे पुजारी

उज्जैन, 05 नवंबर (प्रेस ब्यूरो)। देश भर में दीपावली की तैयारियों का शोर बढ़ रहा है, पर परम्परा के अनुसार सबसे पहले महाकाल के आंगन में पाँच दिवसीय दीपोत्सव का आरम्भ होगा। शुक्रवार, 06 नवंबर को धनतेरस के अवसर पर महाकालेश्वर मंदिर में विशेष पूजन आयोजित किया जाएगा।

पुरोहित समिति के सदस्य लोकेश व्यास ने कहा कि इस दिन धन कुबेर और चांदी के सिक्कों का अभिषेक किया जाएगा, साथ ही बाबा महाकाल को भी एक चांदी का सिक्का अर्पित किया जाएगा। सुबह की भस्म आरती के बाद, गर्भगृह में फुलझड़ी जलाकर दीपावली की शुरुआत पुजारी करेंगे। उन्होंने बताया कि इस पूजन में उज्जैन कलेक्टर रोशन सिंह, एसपी प्रदीप शर्मा सहित लगभग दो दर्जन पंडे‑पुजारी भाग लेंगे।

उसी दिन सुबह लगभग नौ बजे नंदिहाल में गणपति और महालक्ष्मी की पूजा के बाद, पंचामृत और रुद्राभिषेक द्वारा भगवान महाकाल को स्नान कराया जाएगा, जिसमें सुख‑समृद्धि, आरोग्य और विश्व कल्याण की कामना की जाएगी।

यहाँ की दीपावली अन्य मंदिरों से कई मायनों में अलग है। यहाँ त्यौहार को केवल दीप जलाने तक सीमित नहीं रखा जाता; इसे राजा‑दरबार की तरह मान कर विभिन्न अभ्यंग, शृंगार और भोग की परम्पराएँ निभाई जाती हैं। इस वर्ष महेश शर्मा ने बताया कि 08 नवंबर को विशेष पूजन के दौरान पुजारी परिवार की महिलाएं केसर और चंदन का उबटन लगाएंगी, पहले तिल्ली के तेल से अभ्यंग स्नान करवाया जाएगा। स्नान के बाद भगवान को सोने‑चांदी के आभूषण और नए वस्त्रों से सजाया जाएगा।

दीपावली पर अन्नकूट का महाभोग भी लगाया जाएगा, जिसमें गुजिया, पपड़ी, खुरमे, खीर, पूड़ी, भजिया, चावल, दाल, सब्जियां और विभिन्न चटनियाँ शामिल होंगी। पाँचों आरतियों में सुबह की भस्म आरती से लेकर रात की शयन आरती तक फुलझड़ी से बाबा की आरती की जाएगी, और कोटितीर्थ कुंड पर दीपमालाएँ सजाई जाएंगी।

इस साल 08 नवंबर को चतुर्दशी और अमावस्या एक ही दिन पड़ने से तड़के भस्म आरती के दौरान विशेष आयोजन होगा, जबकि नगरवासी शाम को अपने घरों में दीप जलाकर उत्सव मनाएंगे। यह तिथि समन्वय मंदिर की पारम्परिक पूजा व्यवस्था को और भी विशिष्ट बनाता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *