Friday, November 6खबर जो असर करे |
Shadow

सौर ऊर्जा से जगमगाया नारागांव, बना प्रदेश का पहला सोलर ग्राम

रायपुर, 05 नवंबर (प्रेस ब्यूरो)। छत्तीसगढ़ के बालोद जिले के नारागांव ने स्वच्छ ऊर्जा, महिला सशक्तीकरण और सामुदायिक सहभागिता के क्षेत्र में एक नई पहचान स्थापित की है। जिले की सोलर दीदियों की निरंतर मेहनत और सामूहिक पहल के कारण यह गांव प्रदेश का पहला ऊर्जीकृत गांव बन गया है। अब गाँव के 150 से अधिक घरों की छतों पर 2 किलोवॉट के सोलर रूफटॉप सिस्टम स्थापित हो चुके हैं, जिससे कुल मिलाकर 300 किलोवॉट विद्युत उत्पादन हो रहा है। यह उपलब्धि न केवल स्वच्छ ऊर्जा के विस्तार में एक महत्वपूर्ण कदम है, बल्कि ग्रामीण महिलाओं की नेतृत्व क्षमता और आत्मनिर्भरता का भी सशक्त प्रमाण है।

गाँव में सौर ऊर्जा के प्रसार में सोलर दीदियों की मुख्य भूमिका रही है। इन महिलाओं ने स्थानीय परिवारों से संपर्क स्थापित कर उन्हें सौर ऊर्जा के लाभों के बारे में जानकारी दी और छतों पर सिस्टम लगवाने के लिए प्रेरित किया। महिलाओं की सक्रिय भागीदारी, सामूहिक प्रयास और स्व‑प्रबंधन ने इस पहल को जमीन पर सफलतापूर्वक उतराया। इस प्रक्रिया ने ग्रामीण महिलाओं को विकास की राह में नेतृत्व करने का अवसर दिया और गाँव में स्वच्छ ऊर्जा के प्रति जागरूकता को भी बढ़ाया।

इस परियोजना की सबसे विशेष बात इसका शून्य हितग्राही अंशदान और शून्य अतिरिक्त शासकीय सहयोग मॉडल है। इस मॉडल के तहत कोई भी लाभग्राही को सोलर रूफटॉप स्थापित करने के लिये अतिरिक्त कोई राशि नहीं चुकानी पड़ी। सभी कार्य सोलर दीदियों के प्रयास, सामुदायिक सहभागिता और स्व‑प्रबंधन के माध्यम से पूरा किया गया। परिणामस्वरूप ग्रामीणों को पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों पर निर्भरता कम करने, पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने और स्थायी विकास के नए रास्ते खोजने का अवसर मिला है।

गुरूर ब्लॉक के आँचल महिला संकुल संगठन की इस उपलब्धि से यह स्पष्ट होता है कि जब महिलाओं को नेतृत्व का अवसर मिलता है और समुदाय एकजुट होकर काम करता है, तो बड़े से बड़े बदलाव संभव होते हैं। सोलर दीदियों ने यह साबित किया है कि ग्रामीण महिलाएं केवल योजना की लाभार्थी ही नहीं, बल्कि विकास और परिवर्तन की महत्वपूर्ण नेतृत्वकर्ता भी हैं, और इस व्यवसाय से उन्हें अब तक 2.50 लाख रूपए से अधिक की आय भी प्राप्त हुई है। यह अनूठा मॉडल स्वच्छ ऊर्जा, पर्यावरण संरक्षण, महिला सशक्तीकरण और सामुदायिक आत्मनिर्भरता का प्रेरक उदाहरण बनकर छत्तीसगढ़ में हरित ऊर्जा के विस्तार के दिशा‑निर्देश प्रस्तुत करता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *