
रायपुर, 05 नवंबर (प्रेस ब्यूरो)। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज बेंगलुरु के भारतीय विज्ञान संस्थान (आईआईएससी) के निदेशक प्रोफेसर जी. रंगराजन एवं वरिष्ठ वैज्ञानिकों के साथ एक उच्चस्तरीय बैठक का अध्यक्षता करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ को प्राकृतिक संसाधनों के साथ-साथ ज्ञान, विज्ञान, तकनीक और नवाचार की शक्ति से समृद्ध बनाना राज्य सरकार का संकल्प है। “हमारा लक्ष्य छत्तीसगढ़ को केवल औद्योगिक और आर्थिक विकास में ही नहीं, बल्कि वैज्ञानिक अनुसंधान, उच्च शिक्षा, आधुनिक प्रौद्योगिकी और चिकित्सा नवाचार के क्षेत्र में भी देश के अग्रणी राज्यों में स्थापित करना है,” उन्होंने घोषणा की।
बैठक में तीन महत्वाकांक्षी परियोजनाओं पर विस्तृत चर्चा की गई। पहली परियोजना विश्वस्तरीय “मटेरियल कैरेक्टराइजेशन एंड टेस्टिंग फैसिलिटी” के निर्माण की है, जो खनिज, इस्पात, धातु और ऊर्जा उद्योगों को अत्याधुनिक परीक्षण एवं विश्लेषण क्षमताएँ प्रदान करेगी। दूसरी परियोजना में विज्ञान एवं गणित के उत्कृष्ट शिक्षक तैयार करने के लिए चार वर्षीय एकीकृत बीएससी‑बीएड संस्थान का विकास शामिल है, जबकि तीसरी परियोजना में मेडिकल स्कूल की विशेषज्ञता का लाभ लेकर आधुनिक चिकित्सा अनुसंधान और डिजिटल हेल्थ को बढ़ावा देना है।
मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि भारतीय विज्ञान संस्थान की वैश्विक स्तर पर मान्यता और अनुसंधान क्षमताओं को केवल बड़े शहरों तक सीमित नहीं रहना चाहिए। “बस्तर, सरगुजा सहित प्रदेश के ग्रामीण, जनजातीय और दूरस्थ अंचलों में भी प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है। आवश्यकता इन प्रतिभाओं को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, आधुनिक प्रयोगशालाओं, वैज्ञानिक मार्गदर्शन और तकनीकी प्रशिक्षण के बेहतर अवसर उपलब्ध कराने की है,” उन्होंने बताया।
बैठक में आईआईएससी के प्रबंधन से संबंधित प्रमुख सदस्यों के साथ-साथ छत्तीसगढ़ शासन के उच्च अधिकारी जैसे निवेश आयुक्त ऋतु सेन, सचिव राहुल भगत, उच्च शिक्षा विभाग के सचिव अविनाश चंपावत, स्वास्थ्य विभाग के सचिव अमित कटारिया और कौशल विकास विभाग के सचिव डॉ. बसवराजू भी उपस्थित थे। इस संवाद से यह स्पष्ट हुआ कि दोनों पक्ष विज्ञान, शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में गहन सहयोग के लिए तत्पर हैं, जिससे छत्तीसगढ़ का समग्र विकास सुनिश्चित हो सके।
