
चेन्नई, 05 नवंबर (प्रेस ब्यूरो)। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री राजी विजय ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को लिखा पत्र, जिसमें उन्होंने चेन्नई में उच्चतम न्यायालय की एक शाखा स्थापित करने की मांग की है। इस उद्देश्य से मुख्यमंत्री ने सरकार की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति के साथ ही प्रधानमंत्री को औपचारिक अनुरोध भेजा।
पत्र में राजी विजय ने यह बताना शुरू किया कि तमिलनाडु सरकार ने उच्चतम न्यायालय की शाखा स्थापित करने हेतु न्यायाधीशों के पद के अनुरूप आवासीय सुविधाओं समेत सभी आवश्यक बुनियादी ढांचे उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया था। परंतु सात अगस्त, 2007 को पूर्ण पीठ ने यह मानते हुए कि पूर्व के प्रस्तावों से भिन्न होने का कोई आधार नहीं था, इस निर्णय को स्वीकार नहीं किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि संविधान निर्माताओं का उद्देश्य था कि हर नागरिक, चाहे गरीब हो या अमीर, को न्यायालय तक सीधी पहुंच मिले। इसी हेतु भारतीय संविधान में अनुच्छेद 32 को समाहित किया गया था। समय के साथ यह अधिकार ज्यादातर उन लोगों तक सीमित हो गया है जो भौगोलिक रूप से उच्चतम न्यायालय के नजदीक रहते हैं और यात्रा तथा मुकदमे के खर्च उठाकर नई दिल्ली पहुँच सकते हैं।
उन्होंने आगे बताया कि दक्षिण भारत के नागरिकों को नई दिल्ली और दक्षिण भारतीय राज्यों के बीच लंबी दूरी के कारण उच्चतम न्यायालय पहुँचने में विशेष कठिनाई होती है। इस प्रकार चेन्नई में शाखा स्थापित करने से दक्षिण भारत के लोगों को न्याय पाने में सुविधा होगी।
पत्र में रिट याचिका (सिविल) संख्या 36/2016 (वसंतकुमार बनाम एच.सी. भाटिया एवं अन्य) का भी उल्लेख किया गया। 13 जुलाई, 2016 को जारी आदेश में उच्चतम न्यायालय की अलग-अलग पीठों की स्थापना तथा अन्य कानूनी मुद्दों पर विचार किया गया, और पाँच न्यायाधीशों की संविधान पीठ गठित करने की सिफारिश की गई
