
नई दिल्ली, 05 नवंबर (प्रेस ब्यूरो)।
भारतीय सेना ने नागास्त्र‑1 नामक स्वदेशी एंटी‑टैंक लोइटरिंग म्यूनिशन के दूसरे खेप के 450 यूनिट स्वीकार किए। ये ड्रोन्स, जिन्हें सोलर डिफेंस एंड एयरोस्पेस लिमिटेड ने नागपुर में निर्मित किया, GPS से लैस हैं और 2‑मीटर के भीतर सटीकता से लक्ष्य पर हमला कर सकते हैं।
पहली खेप के 120 उपकरणों का प्रयोग ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान के आतंकी ठिकानों पर निशाना साधने में हुआ। उसी काम के लिए सेना ने आपातकालीन खरीद शक्ति के तहत 450 इकाइयाँ ऑर्डर कीं, जिनकी आपूर्ति पिछले माह पूर्ण हुई।
इस सिस्टम में 80 % से अधिक स्वदेशी सामग्री प्रयुक्त है। इसे ‘घूमकर हमला करने वाला हथियार’ कहा जा सकता है, क्योंकि यह लक्ष्य पर उड़कर मंडराता है और सही मौके पर स्वयं‑विनाश करके मार करता है। यदि मिशन रद्द किया जाए तो इसे लौटाया भी जा सकता है, जिससे पुनः उपयोग संभव है।
ड्रोन का रडार प्रतिरोधी डिजाइन और 4 500 मी से अधिक ऊँचाई से निगरानी क्षमता इसे गुप्त प्रवेश और सुरक्षित हमले के लिये उपयुक्त बनाती है। इसकी एंड्योरेंस 60 मिनट है, जिससे यह एक घंटे तक लक्ष्य के ऊपर मंडरा सकता है।
सिस्टम का लॉन्चर पुन: प्रयोज्य है और 360‑डिग्री जिम्बल कैमरा तथा वैकल्पिक थर्मल कैमरा से लैस है, जो दिन‑रात कार्य में सक्षम बनाता है। यह 1.5 किलोग्राम विस्फोटक वॉरहेड लेकर 15 किमी तक निगरानी कर सकता है, जिससे आतंकवादी लॉन्च पेड, घुसपैठियों और प्रशिक्षण कैंप पर सटीक हमले किए जा सकें।
परीक्षण कार्य लद्दाख, उत्तर प्रदेश और झांसी के पास बबीना सहित विभिन्न स्थानों पर संचालित हुए हैं। भविष्य में सेना को इसी तरह के उन्नत स्वदेशी हथियार मिल सकते हैं।
