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सख्त मानक: स्टेराइल दवाओं के लिए ग्रेड ए क्लीन एरिया में माइक्रोबियल निगरानी पर नया नियम

नई दिल्ली, 05 नवंबर (प्रेस ब्यूरो) – केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने स्टेराइल दवाओं के निर्माण में गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से ड्रग्स रूल्स, 1945 की अनुसूची एम में संशोधन का प्रस्ताव दिया है। इस प्रस्ताव के अंतर्गत, ग्रेड ए क्लीन एरिया में सूक्ष्मजीवी संदूषण की निगरानी से जुड़े मानकों को डब्ल्यूएचओ के दिशानिर्देशों के अनुरूप किया जायेगा।

मंत्रालय ने बुधवार को बताया कि 28 अक्टूबर को जारी अधिसूचना संख्या जीएसआर 953(ई) के माध्यम से यह संशोधन प्रस्तावित किया गया है। इसका उद्देश्य अनुसूची एम में निर्धारित मौजूदा माइक्रोबियल संदूषण सीमाओं और डब्ल्यूएचओ के अंतरराष्ट्रीय मानकों के बीच अंतर को समाप्त करना है। प्रस्तावित बदलाव, डब्ल्यूएचओ की तकनीकी रिपोर्ट श्रृंखला संख्या 1044 के अनुलग्नक‑2 में स्टेराइल फार्मास्युटिकल उत्पादों के लिए निर्धारित गुड मैन्युफैक्चरिंग प्रैक्टिस (जीएमपी) दिशानिर्देशों पर आधारित है।

ग्रेड ए क्लीन एरिया स्टेराइल दवाओं के निर्माण में सबसे महत्वपूर्ण क्षेत्र हैं। यहाँ खुली वस्तुओं, कंटेनरों, स्टेरिलाइज़्ड उपकरणों और अन्य घटकों का प्रबंधन होता है। ऐसे क्षेत्रों में सूक्ष्मजीवों की उपस्थिति पर कड़ी निगरानी रखना अनिवार्य है, ताकि दवाओं की गुणवत्ता और सुरक्षा से किसी प्रकार का समझौता न हो।

मंत्रालय के अनुसार, प्रस्तावित संशोधन लागू होने पर अनुसूची एम के प्रावधान डब्ल्यूएचओ के दिशानिर्देशों के अनुरूप हो जाएंगे। इसके साथ ही ग्रेड ए क्षेत्रों में किसी भी प्रकार की माइ

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