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भारत ने मंगलयान के प्रक्षेपण से अंतरिक्ष इतिहास में नया अध्याय लिखा

सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र, 05 नवंबर (प्रेस ब्यूरो)।पांच नवंबर 2013 को भारतीय अंतरिक्ष विज्ञान के इतिहास में एक ऐतिहासिक क्षण चिह्नित हुआ, जब इसरो ने अपने पहले मंगल मिशन, मंगलयान, को सफलतापूर्वक अंतरिक्ष में रवाना किया। इस अभियान ने भारत को अंतरग्रहीय अन्वेषण के क्षेत्र में अपनी मजबूत उपस्थिति दिखाने का अवसर दिया।

मंगलयान को आंध्र प्रदेश के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से पीएसएलवी‑सी25 रॉकेट के माध्यम से प्रक्षेपित किया गया। इस मिशन की लागत करीब 450 करोड़ रुपये थी, जिससे सीमित संसाधनों में जटिल अंतरिक्ष अभियान को अंजाम देने की भारत की क्षमता का स्पष्ट प्रदर्शन हुआ।

मिशन की सबसे बड़ी उपलब्धि यह थी कि भारत पहले ही प्रयास में मंगल की कक्षा तक पहुँचने वाला पहला देश बन गया। साथ ही, मंगल की कक्षा में यान स्थापित करने वाला भारत एशिया का पहला देश भी बना, जबकि पहले अमेरिका, रूस और यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी ने ही यह काम किया था।

लगभग दस महीने की यात्रा के बाद, मंगलयान 24 सितंबर 2014 को मंगल की कक्षा में स्थापित हुआ। इस मिशन ने मंगल ग्रह के वातावरण और सतह से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी जुटाई, जिससे भारत की अंतरिक्ष तकनीक और वैज्ञानिक क्षमता को वैश्विक मान्यता मिली।

इस प्रक्षेपण से भारत ने अंतरिक्ष इतिहास में नया अध्याय लिखा, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा स्रोत बनेगा।

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